आ रहा है ‘चंद्रयान 3’, इसरो चीफ के सिवन ने दी ये महत्वपूर्ण जानकारी

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भारतीय वैज्ञानिकों ने पिछले एक दशक में सफलता ही जिन ऊंचाइयों छुआ है उसका गवाह साल 2019 भी रहा, अब इसरो 2020 की तैयारियों में जुट गया है इन्हीं तैयारियों से जुडी जानकारी को साझा करते हुए इसरो (ISRO) प्रमुख के सिवन (K Sivan)  ने बुधवार को बताया कि चंद्रयान 3 (Chandrayaan 3) प्रोजेक्‍ट को मंजूरी मिल गई है। उन्‍होंने बताया, ‘इस प्रोजेक्‍ट पर काम कर रहे हैं।

इसके लिए चार लोगों को चुन लिया गया है। इन चारों को ट्रेनिंग के लिए रूस भेजने की योजना है।’ साथ ही साथ के सिवन ने ये भी बताया, ‘हमने चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) पर अच्‍छी तरक्‍की की हालांकि हम लैंडिंग में सफल नहीं हो सके, अभी भी ऑर्बिटर काम कर रहा है। यह ऑर्बिटर आने वाले अगले सात वर्षों तक कार्य करेगा और हमें पूरा डाटा भी उपलब्‍ध कराएगा।’

अगले मिशन में शामिल होंगे रोवर और लेंडर लेकिन नहीं होगा ऑर्बिटर

बेंगलुरु में मौजूद इसरो मुख्‍यालय में इसरो चेयरमैन के सिवन ने अपने वक्तव्य में ये स्पष्ट किया कि चंद्रयान-3 में लैंडर और रोवर तो होंगे लेकिन ऑर्बिटर मौजूद नहीं रहेगा. गौरतलब है कि सितंबर 2019 में चंद्रयान-2 मिशन के साथ ऑर्बिटर को सफलतापूर्वक चाँद कि कक्षा में स्‍थापित किया गया था। और तबसे अबतक यह ऑर्बिटर वैज्ञानिक आंकड़ों को पृथ्‍वी पर भेजने में लगा हुआ है.. इस मिशन के दौरान ऑर्बिटर तो चाँद कि कक्षा में पहुँच गया था मगर चंद्रमा की सतह पर हार्ड लैंडिंग के कि वजह से रोवर को स्‍थापित नहीं किया जा सका था.

महत्वपूर्ण बात ये भी है कि इससे पहले इस मिशन नए मिशन से जुडी जानकारी केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी दी थी, मगर किन्हीं कारणों कि वजह से इसके विषय में उन्‍होंने कोई ज्‍यादा विवरण नहीं दिया था. अपनी वक्तव्य में उन्‍होंने बताया था कि चंद्रयान 2 की अपेक्षा कम लागत के साथ चंद्रयान 3 लांच किया जाएगा. साथ ही साथ उन्होंने ये भी कहा था कि चंद्रयान-2 को ‘निराशाजनक’  बताने वाली सभी बातें बेहद गलत हैं. इसके आलावा वो ऐसा मानते हैं कि चाँद कि सतह पर उतरने का भारत का प्रथम प्रयास असफल नहीं रहा है क्यूंकि इससे भारतीय वैज्ञानिकों ने चाँद के बारे में बहुत कुछ सीखा है.