तो आदित्य ठाकरे को मिल सकती है महाराष्ट्र सरकार की कमान, अंदर चल रही हैं ये बातें

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महाराष्ट्र में सरकार और कैबिनेट तय हो चुकी है, आदित्य ठाकरे जिनको नतीजों के बाद पैदा हुए सियासी संकट के बीच मुख्यमंत्री की तरह प्रोजेक्ट करने की तयारी शिवसेना ने की थी उसकी बानगी अब नजर आ रही है, क्यूंकि आदित्य ठाकरे को पिता उद्धव ठाकरे ने अपनी कैबिनेट में एक बेहद ही अहम पद दिया है. और अब सियासत के गलियारों से उडती उडती ख़बरें तो यहाँ तक ये भी आ रहीं हैं कि हो सकता है कि अपने पिता और महाराष्ट्र के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के इसी कार्यकाल के अंत तक सरकार की कमान आदित्य ठाकरे को सौंपी जा सकती है.  

गौरतलब है कि जब सरकार बनाने को लेकर गठबंधन करने वाले तीनों दलों, शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के बीच इस बात को लेकर खूब चर्चा हुई थी कि आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाया जाये, लेकिन तब तीनों के बीच इस बात को लेकर कोई एकमत नजर नहीं आया और शिवसेना की दाल नहीं गली. जब ये बातें सामने आयीं तो शिवसेना के दोनों ही सहयोगी दलों ने तब आदित्य की प्रशासनिक अनुभवहीनता का हवाला देते हुए कहा कि अभी आदित्य को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपने के लिए वो तैयार नहीं हैं मगर दोनों ही दलों ने उद्धव के नाम पर सहमति जताई थी।

वो तो रात गयी सो बात गयी वाली कहानी हो गयी है, लेकिन अब शिवसेना ने आदित्य को जो जिम्मेदारी सौंपी हैं उसके पीछे कहीं न कहीं आदित्य का सियासी कद ऊंचा करने का मकसद छिपा हुआ है. पार्टी के सूत्रों की मानें तो उनके अनुसार पार्टी शुरूआत से ही आदित्य को मुख्यमंत्री के पद पर काबिज देखना चाहती थी. इसके लिए रणनीति बनाई गयी और पहली बार ठाकरे परिवार से आदित्य ठाकरे के रूप में कोई सदस्य चुनावी मैदान में कूदा. वहीँ बातें तो ये भी की जा रहीं है और खबरें भी आ रहीँ हैं कि अगर भाजपा शिवसेना के प्रस्ताव को मान भी जाती तो आदित्य को ही सीएम बनाया जाना तय था.

खास बात ये भी है कि जब तीनों दलों के बीच जब सरकार बनाने को लेकर चर्चाएँ चल रहीं थीं उस वक्त ही उद्धव ने आदित्य को मुख्यमंत्री बनाने की मांग रखी थी, लेकिन आदित्य की इस पद के लिए अनुभवहीनता की वजह से दोनों दलों ने स्पष्ट रूप से इंकार कर दिया था तब इसमें खासतौर पर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने भूमिका निभाई थी और दोनों ही दलों के बीच सामंजस्य बैठाया था.