आर्थिक नीतियों में सुधार और बड़ी योजनाओं से पैदा हुए रोजगार, CII के सर्वे ने भी की पुष्टि

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दोस्तों आपने ये सुना होगा कि भारत में रोजगार नहीं है और सब काम ठप हो गए हैं. लेकिन हाल ही में कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्रीज यानी CII ने छोटे उद्योगों से जुड़ा अपना सबसे बड़ा सर्वे किया है.
इस सर्वे ने कुल एक लाख पांच हजार से भी ज्यादा उद्योगों को कवर किया है जिससे ये सर्वे विश्वसनीयता से ये बताता है कि पिछले चार साल में कितनी नौकरियां सृजन हुई हैं. सबसे दिलचस्प यहाँ ये बात है कि ये सर्वे पुष्टि करता है उन सब कदमों कि जो केंद्र सरकार ने नौकरियां पैदा करने के लिए उठाये है. साथ ही जो बात विश्व बैंक और IMF कह रहे थे कि भारत बहुत तेजी से आर्थिक क्षेत्र में प्रगति कर रहा है उसे भी इस CII के सर्वे ने प्रमाणित कर दिया है. CII का सर्वे अहम इसलिए है कि ये एक निजी संस्था है जिसका गठन 1895 में हुआ था. तभी ये सर्वे एकदम निष्पक्ष के साथ तथ्यों पर आधारित है.

आपको बताते हैं कि क्या कहती है CII कि फाइंडिंग
पहली, ये सर्वे का आधार बहुत बड़ा है जिसमें एक लाख पांच हजार से ज्यादा उद्योग शामिल हैं और ये सर्वे पिछले चार साल में कितनी नौकरियां पैदा हुई हैं ये बताता है. साथ ही ये सर्वे फॉर्मल और इनफॉर्मल सेक्टर्स दोनों को कवर करता है. इस सर्वे में 85% छोटी फर्म शामिल हैं जो ज्यादातर बीस से पच्चीस लोगों को ही नौकरियां देती है.

आगे सर्वे ये बताता है कि पिछले चार साल(2014-2017) में छह करोड़ रोजगार सृजन हुए हैं यानी तेरह प्रतिशत कि नेट जॉब ग्रोथ हुई है. वही अगर यूपीए सरकार कि बात की जाये तो यूपीए सरकार के आखिरी चार सालों में सिर्फ दो पॉइंट पांच प्रतिशत की ही नेट जॉब ग्रोथ हुई थी. कहाँ 13.5 प्रतिशत और कहाँ 2.5 प्रतिशत. आकड़े खुद बता रहे हैं कि पिछले चार साल में रोजगार सृजन में कितनी बढ़ोतरी हुई है. CII के मुताबिक रोजगार सृजन करने में केंद्र सरकार को सफलता इसीलिए मिली है क्योंकि पिछले चार साल में सरकार ने छोटे उद्योगों को सपोर्ट करने के लिए कई बड़े कदम उठाये है.

तीसरा, सर्वे ये बताता है कि तिहत्तर प्रतिशत रोजगार इन चार सालों में छोटे उद्योगों में पैदा हुए हैं. छोटी फिर्म्स सर्वे के मुताबिक बड़ी कंपनियों से ज्यादा तेजी से बढ़ी हैं.
चौथा, आने वाले तीन सालों में सर्वे कहता कि रोजगार और ज्यादा बढ़ेंगे. CII के मुताबिक अगले तीन सालों में पंद्रह करोड़ नए नौकरियां पैदा होंगी.
अब आपको बताते हैं केंद्र सरकार के वो कदम जिनसे पिछले चार सालों में लगभग 6 करोड़ रोजगार छोटे उद्योगों ने पैदा किए हैं.
सबसे पहला कदम था GST. पहले व्यापारियों और उद्योगों को 15 से ज्यादा टैक्स जैसे वैट, एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स जैसे टैक्स देने होते थे. इन टैक्स को जमा कराना व्यापारियों के लिए बहुत बड़ा सरदर्द था. 15 टैक्स के 15 रिकार्ड्स और फिर 15 दफ्तर जहाँ 15 अलग अलग अधिकारियों से डील करना पड़ता था. ऐसे में भ्रष्टाचार के साथ व्यापारियों को भी बहुत परेशानी होती थी. लेकिन GST सिर्फ एक टैक्स है जिसे व्यापारी ऑनलाइन ही जमा करा सकता है.

साथ ही GST कि कम्पोजीशन स्कीम. इस स्कीम के अंदर जिस व्यापारी का टर्नओवर 1.5 करोड़ है वो सिर्फ 2 परसेंट टैक्स अदा कर के आसानी से टैक्स भर सकता है. साथ ही टैक्स को फाइल करना और भरना दोनों प्रक्रियाएं बहुत आसान है.

GST से भ्रष्टाचार कम हुआ है और छोटे उद्योगों को भी बहुत सपोर्ट मिला है.
वही मुद्रा योजना के अंदर सरकार अभी तक सात लाख करोड़ से ज्यादा तक लोन पहले ही दे चुकी है इससे 15.6 करोड़ लोगों को फायदा भी मिला है. मुद्रा योजना के अंदर पचास हजार से दस लाख का लोन बहुत आसानी से बिना किसी कोलैटरल के मिल जाता है. जाहिर है इस योजना को बनाया ही छोटे उद्योगों के लिए गया है.

इसके साथ सरकार की नीतियों ने भी छोटे उद्योगों को बहुत सपोर्ट किया है.
इंटरेस्ट subvention स्कीम जिसकी CII सर्वे भी तारीफ कर चुका है. छोटे उद्योग जब बैंक को लोन वापिस करते हैं तो उन्हें 2 प्रतिशत कम ब्याज देना होता है.

दूसरा श्रम सुविधा पोर्टल जिससे छोटे उद्योग कानूनों का पालन ऑनलाइन ही कर सकते हैं.
तीसरा, TReDS पोर्टल जिससे छोटे उद्योगों को क्रेडिट लेने में बहुत आसानी हो जाती है. छोटे उद्योगों के पास क्रेडिट होता है तो धंधा भी आसानी से चलता रहता है.

चौथा, छोटे उद्योगों पर लगने वाला टैक्स भी केंद्र सरकार ने कम किया है. पहले जो कर 30 प्रतिशत लगता था उसे केंद्र सरकार ने 2015 में 25% कर दिया. यानी 2015 से छोटे उद्योगों के पास 5 प्रतिशत कर की बचत हो रही है.
पाँचवा, एक घंटे के अंदर छोटे उद्योगों को एक करोड़ तक का लोन बिना किसी कोलैटरल के अब मिल सकता है. लोन के लिए अप्लाई करना और लोन लेना अब बहुत आसान हो गया है. इस लोन के ऊपर अब ब्याज भी कम देना होता है.
छठा, केंद्र सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बहुत बड़ा दिया है. और साथ ही मिनिमम गवेर्न्मेंट एंड मैक्सिमम गवर्नेंस के सिद्धांत पर चलते हुए निजी निवेश भी भारत कि अर्थव्यवस्था में बढ़ा है. विश्व बैंक के इज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नस में भारत कि रैंकिंग 2014 में 142 थी लेकिन 2018 में ये रैंक सुधर कर 77 हो गयी है. मूडी रेटिंग एजेंसी ने भी 15 सालों में पहली बार भारत की रेटिंग में सुधार किया है. इस रेटिंग के सुधरने से निजी निवेश बहुत तेज़ी से बढ़ता है.

इन्हीं कदम और नीतियों का नतीजा है कि CII का सर्वे ये कह रहा है पिछले चार सालों में रोजगार सृजन युपीए के कार्यकाल से बहुत ज्यादा हुआ है. भारत कि मजबूत अर्थव्यवस्था को विश्व बैंक, IMF के साथ साथ कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्रीज ने भी मान लिया है. अब समय आ गया है कि विपक्ष भी इन तथ्यों को देखे और मान ले की भारत अब न्यू इंडिया की दिशा में बढ़ चूका है जहाँ भारत कि अर्थव्यवस्था में गति भी और रोजगार भी