भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर ने लॉन्च की नयी पार्टी, ख़त्म हो जाएगा मायावती का राजनीतिक कैरियर ?

501

उत्तर प्रदेश की सियासत में लम्बे वक़्त से हाशिये पर चल रही मायावती ने अपना अस्तित्व बचाने के लिए हर जतन किया. यहाँ तक कि मुलायम सिंह के साथ अपनी पुरानी दुश्मनी को भूल कर समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन भी किया लेकिन कुछ काम न आया. अब उत्तर प्रदेश में मायावती की मुश्किलें और बढ़ गई है. लम्बे समय से दलित वोटबैंक के बीच अपने पांव जमाने की कोशिश कर रहे भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आज़ाद ने अपनी नयी पार्टी लॉन्च कर दी. उन्होंने अपनी पार्टी का नाम आज़ाद समाज पार्टी रखा है. और उसका झंडा भी नीला है, बहुजन समाज पार्टी की तरह. अब उत्तर प्रदेश के सियासी अखाड़े में मायावती की BSP के सामने चंद्रशेखर की ASP खड़ी है.

चंद्रशेखर उसी जाटव जाति से ताल्लुक रखते हैं जिससे मायावती आती हैं. पिछले कुछ महीनों में चंद्रशेखर ने केंद्र सरकार के नीतियों और कानूनों की मुखरता से आलोचना करते हुए खुद को दलितों के सच्चे हितैषी के रूप में स्थापित करने की कोशिश की. चाहे CAA हो या NPR या फिर प्रमोशन में आरक्षण का मुद्दा. हर मंच पर चंद्रशेखर मोदी सरकार के खिलाफ खड़े नज़र आये जबकि मायावती पूरे राजनीतिक परिदृश्य से गायब रहीं. चंद्रशेखर के नयी पार्टी के गठन होते ही बसपा पर असर भी दिखा जब कई बसपा नेता चंद्रशेखर की पार्टी में शामिल हो गए.

अगर बात करें दलित वोटबैंक की तो 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उसमे सेंध लगा दी थी. 2017 का विधानसभा चुनाव हो या फिर 2019 का लोकसभा चुनाव, जिस तरह से भाजपा ने उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन किया उसने ये पुख्ता किया कि अब दलितों का भरोसा मायावती से उठ चुका है. 2022 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होंगे. ये चुनाव मायावती का राजनीतिक भविष्य तय करेगा और चंद्रशेखर का भी. ये तो तय है कि दलित वोट दोनों पार्टियों के बीच बंटेगा और इसका सीधा फायदा भाजपा को होगा.