एक और ट्रेन भूल गई रास्ता? बेंगलुरु से चलकर जाना था बस्ती लेकिन पहुँच गई यहाँ

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कोरोना की वजह से करीब 50 दिनों तक बंद ट्रेनों का परिचालन जब दोबारा शुरू हुआ तो ऐसा लगता है कि रेलवे के कर्मचारी, ड्राइवर, गार्ड वगैरह अपन काम भूल चुके हैं. क्योंकि दो दिनों के भीतर ऐसा दूसरी बार हुआ है कि ट्रेन को जाना था कहीं और पहुँच गई कहीं और. दो दिन पहले भी ऐसी ही एक और घटना हो चुकी है, जब मुंबई से गोरखपुर के लिए चली ट्रेन अपना रास्ता भटक गई और ओडिशा के राउरकेला पहुँच गई. इस मामले में रेलवे की घोर लापरवाही सामने आई थी. अब लापरवाही का एक और मामला फिर सामने आया है. गुरुवार को बेंगलुरु से 1,450 श्रमिकों को लेकर निकली ट्रेन को बस्ती जाना था लेकिन वो गाजियाबाद पहुँच गई.

हुआ दरअसल ये कि गुरुवार को श्रमिक स्पेशल ट्रेन 1,450 यात्रियों को लेकर बेंगलुरु के चिक्काबनावारा स्टेशन से रवाना हुई. रूट के मुताबिक ट्रेन को सिकंदराबाद, नागपुर, इटारसी, झांसी, कानपुर और लखनऊ होते हुए बस्ती जाना था. ट्रेन को 2,456 किलोमीटर की यात्रा 45 घंटे में तय करनी थी. ट्रेन को झांसी से डायवर्ट किया गया और वह शनिवार शाम को गाजियाबाद पहुंच गई. ट्रेन जब गाजियाबाद पहुंची तो यात्रियों को लगा वो बस्ती पहुँच गए हैं. लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि वो बस्ती नहीं बल्कि गाजियाबाद पहुँच गए हैं तो यात्रियों के होश उड़ गए. एक तो भीषण गर्मी और ऊपर से भूख और प्यास से बेहाल यात्रिओं की हालत ख़राब होने लगी. उन्हें कुछ पता नहीं तह कि वो कब तक अपने घर पहुँच पायेंग.

सांकेतिक तस्वीर

तारियों को कुछ पता नहीं था. कई यात्रियों ने बताया कि नागपुर के बाद से उन्होंने खाना तक नहीं खाया है. यात्रियों के पास पीने का पानी भी ख़त्म हो गया था. श्रमिक स्पेशल में सारे बोगी स्लीपर क्लास के हैं इसलिए भूख और प्यार से बेहाल यात्रियों को गाजियाबाद की भयंकर गर्मी ने हलकान करना शुरू कर दिया. गाजियाबाद स्टेशन पर यात्रियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था की गई.