आतंकियों का बचाव करने वाले BBC के पत्रकारों को ये बात ज़रूर सुननी चाहिए

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NIA दीवाली के पटाखों को बम बता रही है. प्रेशर ट्राली के नोजल को रॉकेट लांचर बता रही है. देसी कट्टो को घातक हथियार बता रही है. बेचारे मासूम से 20 साल के बच्चे जिनके बाप दादाओ में किसी का कोई पुलिस रिकार्ड तक नही है उन्हें आतंकी बताया जा रहा है. वीडियो था जिसमे यही सब लिखा था जो उपर आपने अभी पढ़ा. हमारे देश की मीडिया आज 2 धड़े में बटी हुई है एक वो धड़ा है जो ये कहता है कि nia ने आतंकियों को पकड़ा. भारी मात्रा में बम बनाने की सामग्री के साथ. दूसरा धड़ा जो कह रहा है सुतली बम है प्रेशर ट्राली का नोजल है देसी इससे हथियार कैसे बनेगा . पकड़े गए लोग मासूम है. ये जो दूसरा धड़ा है वो वो तुरन्त फैसला सुनाने के मोड में आ जाता है. लगता है bbc इसी धड़े में आता है. जो nia को झूठा साबित कर सकता है लेकिन आतंकियों को आतंकी नही बता सकता. इस वीडियो को जरा देखिए. देखने के बाद हमने इसकी पड़ताल की तो पता चला इस रिपोर्ट को तैयार करने वाले bbc के काबिल पत्रकार है. दिलनवाज़ पाशा. हमने इनकी फेसबुक वॉल को तलाशा ब्लू वेरिफिएड अकाउंट है इनका.

बड़े नाम है. लेकिन खबरों के मामले बहुत चूजी है सिर्फ करते है. सिर्फ सेलेक्टिव खबरे दिखाते है. इनकी नज़र में दुनिया मे जो कुछ भी हो रहा है बस मुस्लिमो के साथ गलत हो रहा.

पाशा जी आप बेशक अपनी कौम की बेहतरी के लिए काम करें. आपसे कोई शिकायत नही. लेकिन एक गुज़ारिश है कम से देश की सुरक्षा में लगी एजेंसियों पे सवाल उठाना बन्द करें. आप में से बहुत से लोगो ने हाल ही में रिलीज हुई वेब सीरीज मिर्जापुर देखा होगा. उसमे एक सीन है जिसमे बताया गया है. ट्रक के स्टेयरिंग से सबसे अच्छा कट्टे का नोजल बनता है. छोटे शहरों में ट्रैक्टर के स्टेयरिंग का नोजल या पानी के टंकी में यूज़ होने वाला पाइप भी कट्टे बनाने में काम मे लिया जाता रहा है. कइयों की हत्याएं हुई है इस तरह से बनाये गए हथियारों से. आपकी जानकारी थोड़ी अधूरी है. थोड़ा ज्ञान देते हुए मैं आपको बता दूं . nia की टीम ने रॉकेट लॉन्चर सहित कई और विस्फोटक हथियारों के साथ. उन आतंकियों को पकड़ा है. लेकिन ट्विटर पे आप फोटोज का क्रॉप वर्जन अपलोड करके लोगो को गुमराह कर रहे है. दिलनवाज़ जी मैं आपको बताना चाहूंगा .चेहरे की मासूमियत से कोई बेगुनाह साबित नही हो जाता. अजमल कसाब भी दिखने में बड़ा मासूम था. खुदा न करे अगर वे अपने नापाक इरादों में कामयाब हो गए होते रॉकेट लांचर न हिन्दू देखता न मुसलमान. बम के धमाकों में मरता है सिर्फ और इंसान. चलते चलते सिर्फ इतना ही कहूंगा. अगर nia को सब कुछ सुनियोजित ही करना होता तो वे बहुत से अन्य भारी भरकम हथियारों के साथ. भी उन्हें मीडिया में दिखा सकते थे लेकिन जितना सच था nia ने वही दिखाया. लेकिन ये बात आपको तब पता चलेगी. जब आप nia की रिपोर्ट पढोगे उनके अधिकारियों से बात करोगे. लेकिन आपको तो आतंकियों से और उनके रहनुमाओं से बात करनी है इसलिए आप सच से कोसो दूर है. आप सरकार की जितनी आलोचना कर सकते है करिये लेकिन nia को तो बख्श दीजिये क्योंकि वे सतर्क है तभी हम और आप सुरक्षित है.

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