“कश्मीरी पंडितों को मिले विशेषाधिकारों से घाटी के मुस्लिमों में आक्रोश”- बरखा दत्त

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पत्रकारिता को भारतीय जनतंत्र का चौथा स्तम्भ माना गया है.. लेकिन ताज्जुब होता है जब ऐसे पत्रकार जो पत्रकारिता करते करते यह ही भूल गए कि वो भारतीय हैं.. पाकिस्तानी नही.. उन्हें 2008 में पद्म श्री से नवाज़ दिया जाता है.

यह पत्रकार हैं बरखा दत्त जिन्हें एजेंडा बना लेने में महारत हासिल है.. अपने वजनदार शब्दों में अक्सर वो हकीकत की तस्वीर बदलते हुए.. और एक ख़ास तबके का समर्थन करते हुए.. उन्हें इस देश के सबसे शोषित और पीड़ित वर्ग दर्शाते हुए नजर आती हैं..

सुबूत आप देख लीजिये

source – ndtv

“today helpless victims.. they were once the priviliged elite of the valley,
they may have been a minority but at that time they have monopolised government jobs, plumposting and other such social benefits, infact the sharp economic disparity between the pandits and the poor muslim majority was one of the earliest reason for popular discontentment in the state. “

कश्मीरी पंडितों को कश्मीरी मुस्लिमों द्वारा भगाए जाने को यह कहते हुए सही ठहराया कि उन्हें सरकार द्वारा विशेष अधिकार प्राप्त थे इसीलिए घाटी के बेचारे मुस्लिमों के मन में असंतोष था..

और इसीलिए बुरहान वानी जैसे जिहादियों से भी इनकी हमदर्दी पर ताज्जुब नही होता.

Proof 2 :

बरखा दत्त यह दिखाने की कोशिश करती रही कि बुरहान वानी कश्मीर के लिए लड़ रहा था… उन्होंने बार बार यह सवाल पूछा जबकि बुरहान का साथी कहता रहा कि वो कश्मीर के लिए नहीं इस्लाम के लिए लड़ रहा था

कश्मीरी मुस्लिमों के प्रति उनकी हमदर्दी आप इससे भी जान सकते हैं कि घाटी में पत्थरबाज़ों और जिहादियों पर पेलेट गन्स के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाती रही हैं, मगर इनके अलावा देशभर के तमाम मुद्दों पर यह शांत रहती हैं

1999 में कारगिल वॉर के दौरान उनकी लापरवाही कहें या जान बूझकर की गई गलती जिसके कारण हमारी सेना के कई जवान शहीद हो गए इनमें कारगिल वॉर के हीरो कप्तान बत्रा भी शामिल थे.. दरअसल बरखा दत्त के पास वो सॅटॅलाइट फ़ोन था जिससे आसानी से उनकी लोकेशन ट्रैक की जा सकें.. इसके अलावा अपनी लाइव रिपोर्टिंग के दौरान वो लगातार अपनी लोकेशन बताती रहीं.. कप्तान बत्रा के कैंप पर हमला होने से कुछ ही वक़्त पहले वो वहां थी.. उनका हटना हुआ और टाइगर हिल पर कप्तान बत्रा के कैंप पर हमला.. जिसमें उनके साथ साथ भारतीय सेना के लगभग 20 जवान शहीद हो गए .. उसके बाद वो और उनकी टीम 56 ब्रिगेड हेडक्वार्टर की लोकेशन शेयर करती है और निकल जाती है.. और 5 मिनट बाद पाकिस्तानी आर्मी उस लोकेशन पर हमला करती है.. वहां मौजूद एसटीडी बूथ को सीधा निशाना बनाया जाता है जिसमें एक ऑफिसर और 17 गढ़वाल राइफल के तीन जवान शहीद हो जाते हैं..

इतनी बड़ी गलती मात्र लापरवाही तो नहीं हो सकती.. अब आप बताइए इसे क्या समझा जाये.. ?? यह सवाल हम आप पर छोड़ते हैं बस जाते जाते आप को यह तस्वीर दिखाते जाते हैं