बरखा दत्त और इदरीस के इत्तेफाकों का पूरा सच

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Propaganda पत्रकारिता की queen कही जाने वाली बरखा दत्त ने एक नया ढोंग फ़ैला रखा है, इनके महान कौशल का उदाहरण आप भी देखिये. बरखा दत ने हाल ही में एक विडियो शेयर किया है जिसमे वो अपने दर्शकों को कुछ संजोग गिनवा रही हैं.

हाल ही में बरखा से इदरीस-उल-हक़ नाम का एक कश्मीरी व्यक्ति twitter के ज़रिये अपनी माँ को ढूंढने के लिए मदद मांगने लगा क्यूंकि उसकी अपनी माँ से बात हुए करीब 14 दिन गुज़र गए थे. ये कश्मीरी मुस्लिम पुणे के एक प्राइवेट फर्म में काम करता है. इत्तेफाक से जब बरखा श्रीनगर जा रही थी उन्हें उसी फ्लाइट में इदरीस -उल-हक़ भी मिल जाता है जो की अपनी माँ से मिलने कश्मीर वापस जा रहा होता है.

वो इद्रेस से मिल कर उसका एअरपोर्ट पर ही एक विडियो बनाती हैं,जिसमे वो ये कहता है की उसकी माँ को शुगर की बीमारी है और वो बहुत डरा हुआ था की उसके घर वाले कैसे हैं, फ़ोन सेवाएँ बंद है बात नहीं हो पा रही है.

इसके बाद वो इत्तेफाक से इदरीस का पीछा करते हुए वो उसके घर तक पहुच गई, और इदरीस के पिता अल्ताफ के सामने बैठ कर ये पूरी कहानी नरेट करने लग गयीं. वो एक आम आदमी की नज़र से इस मसले को जनता तक पहुचने की बात कह रहीं थी. लेकिन जिस ट्रेंड के तहत इदरीस ने बरखा को ट्वीट किया था वो उसी के द्वारा शुरू किया गया था. अब इतने सारे इत्तेफाक गैर-इरादतन तो नहीं हो सकते,जब इस बात पर BALA नाम के twitter हैंडल ने गौर किया तो twitter पर बरखा की जम कर किरकिरी हुई.

यहाँ एक बात तो साफ़ है की बरखा और इदरीस का मिलना कोई संजोग नहीं था बल्कि जनता को गुमराह करने की कोशिश थी. अगर वो सच में कश्मीरों को इस वजहसे बहुत दिक्कत हो रही होती तो बरखा को एक pre-planned साजिश के तेहत इस झूठे मुलाकात की कहानी नहीं रचनी पड़ती. लाखों कश्मीरियों के दर्द को भारतीय मीडिया चैनल नहीं भांप पाए. मगर कुछ महान पत्रकार जैसे शेला राशीद, सागरिका घोष और बरखा दत को न जाने ऐसी खबरें कहा से मिल जाती है.