राम मंदिर पर आया ये फ़ैसला आने वाली समस्त पीढ़ियों को गौरवान्वित करेगा

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राम मंदिर पर फैसला आ चुका है। दशकों के विवाद का पटाक्षेप हो चुका है। कुछ लोग इसे भारतीयता की जीत और देश की एकता और अखंडता का प्रतीक बता रहे हैं, तो कुछ लोग इस फैसले को लेकर दबे स्वर में विरोध की आवाज़ उठा रहे हैं। हालांकि स्वागत करने वालों की तादाद इतनी ज्यादा है कि विरोध के सुर इसमे नगण्य हो जाते हैं। एक एक कर अगर हम इस फैसले का विश्लेषण करें तो हमें क्या मिला..?

आज इसी की चर्चा मैं आपसे करूंगा। सबसे पहले किसकी जीत किसकी हार हुई इस चश्में को उतार कर हम अगर देखें तो ये न्यायपूर्ण फैसला होते हुए भी अपने पीछे कुछ सवाल छोड़ जाता है। पहला विवाद जमीन के मालिकाना हक को लेकर था। जिसका मालिकाना हक रामलला को दिया गया है तो जाहिर सी बात है दूसरे पक्ष का दावा गलत था। लेकिन फिर भी उसे जमीन दी गयी। ताकि दूसरा पक्ष भी संतुष्ट रहे। ये सुप्रीम कोर्ट का अपना विशेषाधिकार हो सकता है कि कुछ दुर्लभ मामलों में अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर किसी ऐसे फैसले की मिसाल पेश करें जैसा राम मंदिर के केस में किया है। अब बात करते हैं कुछ कानूनी पहलुओं पर जिसे कोर्ट ने फैसला सुनाते वक़्त मेंशन किया है। न्यायालय ने asi की रिपोर्ट को अपनी सुनवाई के सर्वोच्च आधार माना है।

वहाँ 12वीं सदी में मंदिर था इस बात की पुष्टि है। मंदिर को गिरा के ढांचा बनाया गया इस बात की कोई पुष्टि नही। वहाँ मंदिर तो था लेकिन वो जन्मभूमि ही है इस बात की कोई पुष्टि नही है। चूंकि मंदिर पहले था और पूजा अर्चना नियमित होती थी इस तथ्य को ध्यान में रखकर देश की सर्वोच्च अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। फैसले में भावनात्मक पक्ष या आस्था के पक्ष को किनारे रखकर सिर्फ कानूनी पक्ष को ही तरजीह दी गयी। ऐसे में कोर्ट पर ये आरोप लगाना कि कोर्ट ने दबाव में फैसला लिया ये सरासर गलत है। कोर्ट ने समाज के सौहार्द को बनाये रखने के लिए संतुलन बनाकर फैसला दिया है। अब ये हमारी और आपकी जिम्मेदारी है। कोर्ट और सरकार की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए। हम ये साबित करें कि हम इन तमाम सदियों की सबसे ज्यादा बौद्धिक पीढ़ी है जो बड़ी से बड़ी मुश्किलों को इतनी आसानी से निपटाने में सक्षम है । जो आने वाली सभी पीढ़ियों के लिए एक मिसाल की तरह होंगी। मंदिर बनने से क्या होगा क्या नही होगा इसकी चर्चा कभी और फिलहाल स्वागत करिये। अब वास्तव में रामलला हुए अयोध्या में विराजमान। और अल्लाह के बंदों को भी मिला भरपूर सम्मान। यही तो है हमारा अनूठा हिंदुस्तान।