निधन के 33 सालों बाद मिला पूजा करने का अधिकार

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राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है और इस फैसले के बाद राम मंदिर बनने का रास्ता साफ़ हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े के दावे को खारिज कर दिया. हालाँकि अब आपको बताते हैं कि आखिर कौन है गोपाल विशारद जिनके पक्ष को रामलाल की पूजा करने का अधिकार मिला है.
दरअसल 69 साल बाद आख़िरकार सुप्रीम कोर्ट ने गोपाल सिंह विशारद को वहां पूजा करने का अधिकार दे दिया है. लेकिन यह फ़ैसला उनकी मौत के 33 साल बाद आया है.
अयोध्या विवाद पर शुरुआती चार सिविल मुक़दमों में से एक गोपाल सिंह विशारद ने दायर किया था. गोपाल सिंह विशारद और एम. सिद्दीक दोनों ही राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में मूल मुद्दई थे और अब दोनों का ही निधन हो चुका है और दोनों के ही वारिस उनके केस को देखते आ रहे हैं.


16 जनवरी 1950 को गोपाल सिंह विशारद ने फैजाबाद सिविल जज की अदालत में सरकार, ज़हूर अहमद और अन्य मुसलमानों के खिलाफ़ मुक़दमा दायर कर कहा कि ‘जन्मभूमि’ पर स्थापित भगवान राम और अन्य मूर्तियों को हटाया न जाए और उन्हें दर्शन और पूजा के लिए जाने से रोका न जाए… हालाँकि इस केस में समय समय में सुनवाई होती रही फैसला आता रहा है और अब सुप्रीम कोर्ट का सुप्रीम फैसला आ गया है. आइये अब हम आपको सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देते है. अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने इस फैसले में विवादित जमीन पर रामलला का हक माना है यानी विवादित जमीन राम मंदिर के लिए दे दी गई है. जबकि मुस्लिम पक्ष को अलग स्थान पर जगह देने के लिए कहा गया है. यानी कोर्ट ने अयोध्या में ही मस्जिद बनाने के लिए अलग जगह जमीन देने का आदेश दिया है. राम मंदिर निर्माण के लिए कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीन महीने के अंदर ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने यह फैसला सर्वसम्मति से दिया है.


सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा है कि विवादित जमीन पर मुसलमान अपना एकाधिकार सिद्ध नहीं कर पाए. इसलिए विवादित जमीन पर रामलला का हक है. जबकि मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ जमीन किसी दूसरी जगह दी जाएगी. कोर्ट ने कहा कि केंद्र या राज्य सरकार अयोध्या में उचित स्थान पर मस्जिद बनाने को जमीन दें. मुस्लिम पक्ष के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन फैसले में कई विरोधाभास है, लिहाजा हम फैसले से संतुष्ट नहीं है. उन्होंने कहा कि हम फैसले का मूल्यांकन करेंगे और आगे की कार्रवाई पर फैसला लेंगे.


वैसे फैसले पर शान्ति बनाये रखने के लिए प्रशासन द्वारा बड़े पैमाने पर व्यवस्था की गयी है.. पुलिस और crpf के जवानों को तैनात किया गया है.. लोगों से शान्ति बनाये रखने की अपील की गयी है.
अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाया. इस पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नज़ीर ने फैसला सुनाया. खास बात है कि यह फैसला पांचों जजों की सर्वसम्मति से सुनाया गया है.