अयोध्या केस में 6 अगस्त से रोज सुनवाई का अखिर क्या है पूरा मामला समझिए इस आर्टिकल में

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देश की राजनीति में हमेशा से केंद्र बिंदु रहा अयोध्या का राम मंदिर मसला अब एक बार फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में रोज़ सुनवाई का फ़ैसला किया है। देश के राजनीतिक इतिहास में सबसे संवेदनशील मुद्दा क्या अब सुलझ जाने की कगार पे है ? हर ज़ुबान पर बस यही चर्चा है। लेकिन ये इतना आसान फ़ैसला नही होने जा रहा है न सुप्रीम कोर्ट के लिए ना पक्षकारों के लिए और न ही देश की अखंडता और एकता के लिए। बहरहाल फ़ैसला जो भी हो आइए हम पांच पॉइंट्स में समझतें हैं कि इस मामले में क्या हुआ है और आगे क्या होने वाला है।

1. तेज सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि मध्यस्थता पैनल समाधान निकालने में कामयाब नहीं हो पाया और अब रोजाना सुनवाई शुरू होगी। इससे साफ है कि सभी पक्षों की दलीलें जल्द पूरी होंगी और CJI के रिटायरमेंट से पहले मामले का समाधान निकल सकता है। पांच जजों की संविधान पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है, जिसमें जस्टिस एसए बोबडे, डीवाई चंद्रचूड, अशोक भूषण और एस. अब्दुल नजीर भी शामिल हैं। 

2. निर्मोही अखाड़े और रामलला विराजमान का केस पहले
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के बाहर हिंदू महासभा के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि उन्होंने पहले ही मांग की थी कि इस मामले का हल मध्यस्थता के जरिए नहीं निकल सकता है और इसके लिए रोजाना सुनवाई होनी चाहिए। जैन ने कहा कि आज खुशी का दिन है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की रूपरेखा भी तय कर दी है। इसके तहत संविधान पीठ निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान का केस पहले देखेगी। हिंदू पक्ष पहले अपने तर्क रखेंगे जिससे मुस्लिम पक्ष उसका जवाब दे सकें। 

3. रोजाना सुनवाई का क्या मतलब?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि वह 6 अगस्त से रोजाना सुनवाई करेगा। इस पर लोगों को भ्रम है कि इसका मतलब सोमवार से लेकर शुक्रवार तक है या कुछ और। वास्तव में संविधान पीठ सप्ताह में तीन दिन मंगलवार से बृहस्पतिवार तक सुनवाई करेगी क्योंकि पीठ बाकी के दो दिन दूसरे मामले देखती है। ऐसे में अयोध्या पर रोजाना सुनवाई हफ्ते के तीन दिन होगी। 

4. मुस्लिम पक्ष की दलीलें 20 दिन में!
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अयोध्या केस में सुनवाई रोजाना की जाएगी जब तक कि दलीलें पूरी न कर ली जाएं। वहीं, मुस्लिम पक्षों की तरफ से पेश हुए वकील राजीव धवन ने कुछ परेशानियों की तरफ इशारा करते हुए सुनवाई में देरी करने का प्रयास किया लेकिन CJI की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई टालने से इनकार कर दिया। बेंच ने कहा कि सुनवाई के दौरान हम इन आपत्तियों को देखेंगे। धवन ने कहा कि वह मुस्लिम पार्टियों की तरफ से केस में अपना पक्ष रखने के लिए 20 दिन का समय लेंगे। 

5. फैसला 90 दिन में आएगा?
रोजाना सुनवाई से साफ है कि अब अयोध्या केस समाधान की तरफ तेजी से आगे बढ़ेगा। हालांकि यह भी ध्यान में रखना होगा कि आने वाले दिनों में त्योहार और छुट्टियां पड़ेंगी। आपको बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर 2019 को रिटायर होंगे। ऐसे में उनके रिटायर से पहले यानी अगले 100 दिनों में मामले में फैसला आने की उम्मीद की जा सकती है। उधर, बीजेपी सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने रोजाना सुनवाई के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उम्मीद है कि सितंबर के आखिर तक सुनवाई पूरी हो जाएगी।

तो ये है राम मंदिर मुद्दे पर सुनवाई की पूरी रूप रेखा। इस मामले में अब तक इतना ही काम हुआ है और आगे क्या होगा ये सब भविष्य के गर्भ में है। उम्मीद करते है देश की सियासत को हमेशा से झकझोर कर रख देने वाले इस मुद्दे का जल्द ही कोई न्यायोचित समाधान निकलेगा।