राम जन्मभूमि केस में सुनवाई पूरी, अब फैसले का इंतज़ार, कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

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अयोध्या राम जन्मभूमि केस की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में पूरी हो गई. सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. सबसे ख़ास बात ये रही कि सुनवाई तय समय सीमा से 1 घंटे पहले 4 बजे ही ख़त्म हो गई. जबकि चीफ जस्टिस ने सुबह ही स्पष्ट कर दिया था कि बुधवार 5 बजे के बाद कोई सुनवाई नहीं होगी. संवैधानिक बेंच में सीजेआई रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. ए. नजीर शामिल हैं.

सीजेआई की अध्यक्षता वाली संवैधानिक बेंच ने संबंधित पक्षों को ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ’ पर लिखित नोट रखने के लिए 3 दिन का अतिरिक्त समय दिया है. मोल्डिंग ऑफ रिलीफ का मतलब होता है कि सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने जो गुहार लगाई है उस पर कोई संभावना बनती है या नहीं ये देखा जाता है.

आखिरी दिन की सुनवाई के दौरान कोर्टरूम में जमकर ड्रामा हुआ. मुस्लिम पक्षकार के वकील राजीव धवन ने चीफ जस्टिस के सामने ही एक पुराना नक्शा फाड़ दिया, जिस पर चीफ जस्टिस नाराज हो गए. उन्होंने कहा, “हम सुनवाई को इस तरह से जारी नहीं रख सकते. लोग खड़े हो रहे हैं और बिना बारी के बोल रहे हैं. हम भी अभी खड़े हो सकते हैं और मामले की कार्यवाही को खत्म कर सकते हैं.”

उधर कोर्ट में चल रहे दलीलों के बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक्शन में आ गई. अयोध्या में धरा 144 तो पहले से ही लागू गई. आज पुरे राज्य में सभी अधिकारियों की छुट्टियाँ कैंसल कर दी गई और उन्हें अपने अपने जिला मुख्यालय में बने रहने के निर्देश दिए गए हैं. 10 दिनों बाद दिवाली है. कहा तो ये जा रहा है कि त्यौहार क्ले मद्देनजर साम्प्रदायिक सौहार्द बनाये रखने के लिए ऐसा किया जा रहा है लेकिन अगर गहराई से देखे तो ये योगी सरकार की अपनी तरफ से की जाने वाली तैयारियां है.