‘एक ऐसा नेता जिसने विपक्षी पार्टियों से लड़ाइयाँ तो बहुत कीं लेकिन दुश्मनी किसी से नहीं’

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एक ऐसा नेता जिसने देश पर नहीं दिलों पर राज किया. एक ऐसा नेता जिसने विपक्षी पार्टियों से लड़ाइयाँ तो बहुत कीं लेकिन दुश्मनी किसी से नहीं. सच्चे मायनों में अजातशत्रु थे अटल बिहारी बाजपेयी … आज उनका 94वां जन्मदिन है, और हम आज उनकी कुछ बातें आप सभी तक लाये हैं…

25 दिसम्बर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक स्कूल अध्यापक कृष्ण बिहारी बाजपेयी के यहाँ जन्म हुआ था अटल बिहारी बाजपेयी का. वो एक राजनेता, कवि, पत्रकार और प्रखर वक्ता सबकुछ थे. वो देश के पहले नेता थे जो सयुंक्त राष्ट्र की सभा में हिंदी में बोले थे.

वो समय जब नेता बस परमाणु परीक्षणों की बातें ही किया करते थे, तब अटल बिहारी बाजपेयी जी ने गुपचुप तरीके से पोखरण में एक के बाद एक, पांच परमाणु परीक्षण करवाए. उनका कहना था “छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता, टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता”.

उनके द्वारा उठाये गए साहसिक कदम उनकी कही बातों की पुष्टि करते हैं. और उनकी कही बातें अच्छी इसलिए भी लगती थीं क्योंकि लोग खुद को उन बातों से जोड़ पाते थे… अटल बिहारी बाजपेयी आजीवन अविवाहित रहे. उन्होंने एक बच्ची ‘नमिता’ को गोद लिया…बात जब जीत और हार की हो तो अटल जी कहते हैं “जीत और हार जीवन का एक हिस्सा है, जिसे समानता के साथ देखा जाना चाहिए”अटल बिहारी बाजपेयी जी एकमात्र ऐसे नेता हैं जिनका नाम उनके विरोधी भी सम्मान के साथ लेते हैं… वो कुल दस बार लोकसभा सदस्य रहे और दो बार राज्यसभा…


वो कहते थे.“होने ना होने का क्रम इसी तरह चलता रहेगा, हम हैं, हम रहेंगे, ये भ्रम भी सदा पलता रहेगा” लोकतंत्र पर चुटकी लेते हुए अटल जी कहते हैं कि “लोकतंत्र एक ऐसी जगह है जहां दो मूर्ख मिलकर एक ताकतवर इंसान को हरा देते हैं” भारत और पाकिस्तान को लेकर उनके दिए गए दो बयान जो बहुत से लोगों की जुबान पर लम्बे वक़्त तक चढ़े रहे वो हैं कि “अगर भारत धर्मनिरपेक्ष नहीं है, तो भारत बिलकुल भारत नहीं है” और “आप मित्र बदल सकते हैं, पर पडोसी नहीं”

उनकी हर बात उनकी समझ की ऊंचाई को बयान करती है, इसी साल 16 अगस्त को अटल बिहारी बाजपेई ने इस संसार को अलविदा कहा और खुद को चाहने वालों की आँखों को नम कर दिया. आज उनकी जयंती पर हम उनको दिल से नमन करते हैं… वो हमेशा अटल थे, और अटल ही रहेंगे…