पूर्वोत्तर में मोदी सरकार ने लिखा नया इतिहास, अलग बोडोलैंड राज्य की मांग ख़त्म, हुआ शांति समझौता

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लम्बे समय से अलगाव कि मांग के कारण हिंसा से जूझ रहे पूर्वोत्तर में अब शांति कायम होगी. केंद्र सरकार को इस क्षेत्र में बड़ी कामयाबी मिली है. अलग बोडोलैंड की मांग करने वाले चार संगठनों ने हिं’सा का रास्ता छोड़ कर भारत सरकार के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया है.  सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में नेशनल डेमोक्रेटिक फेडरेशन ऑफ बोडोलैंड (NDFB) ने असम सरकार के साथ समझौता किया, जिसके तहत अब अलग बोडोलैंड राज्य की मांग नहीं की जाएगी.

नेशनल डेमोक्रेटिक फेडरेशन ऑफ बोडोलैंड (NDFB) की तरफ से लम्बे समय से अलग राज्य बोडोलैंड की मांग की जा रही थी और उसके लिए हिंसा का सहारा लिया जा रहा था. बोडो उ’ग्र’वादियों द्वारा की गई हिं’सा में अब तक करीब 2823 नागरिक और 239 सुरक्षाबल मा’रे गए लेकिन अब इस समझौते के बाद तस्वीर पूरी तरह से बदल गई है.

समझौते के अवसर पर गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि, ‘आज भारत सरकार, असम सरकार और बोडो संगठन के चार समूहों के बीच समझौता हुआ है, ये सुनहरे भविष्य का दस्तावेज है. समझौते के दौरान इस दौरान NDFB संगठन के रंजन दैमिरी, गोविंदा बासुमैत्री, धीरेन बोरे और बी. सारोगैरा समेत अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे. पिछले दिनों ही बड़ी संख्या में बोडो उग्रवादियों ने भी आत्मसमर्पण कर सार्वजनिक जीवन में कदम रखा था. करीब 644 उग्रवादियों ने सरकार और पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था.