लगभग 10 सालों तक आसिया बीबी रही सलाखों के पीछे

446

कहानियां और खबरें खोजना हमारा काम है. ख़बरों का पोस्टमार्टम करना हमारा काम है. ये काम हम इतना करते हैं कि हमारी आदत सी हो गयी है, खबर को ढूंढना, खरोंचना, छीलना और चीरना. जो भी करना हो, हमें हर खबर के अन्दर से बस सच निकालना होता है. हमें हर खबर की वज़ह जाननी होती है. यही वज़ह है कि वीमेन’स डे पर भी हम ख़बरों की खोजबीन में लगे थे.


एक हैडलाइ आँखों के सामने से गुज़री तो आँखें बड़ी हो गईं, माउस के स्क्रॉल बटन ने उल्टा घूमना शुरू कर दिया. हैडलाइन कुछ इस तरह थी,


“एक गिलास पानी ने दिलाई आसिया को मौत की सज़ा…!”


हैडलाइन चौंकाने वाली थी, इसलिए खबर को खोले बिना रहा ना गया. अन्दर गए तो पता चला कि मामला गुथा हुआ है, और परतों में फंसा हुआ है.

ये घटना पाकिस्तान की थी, और पूरी तरह से सच थी. पाकिस्तान की एक ईसाई महिला आसिया नूरीन पर आरोप था कि उसने बहस और कहासुनी के दौरान, पैगम्बर मोहम्मद का अपमान किया है. लेकिन बहुत सी बातों को अपने भीतर उलझाए हुए थी.


अलग- अलग समाचार एजेंसियों के पोर्टल्स को खंगाला तो पाया कि तारीखें सब में सेम हैं, लेकिन घटना को सभी ने अपने- अपने तरीके से परोसा है. इसलिए अब सच जानने की तलब और बढ़ चली थी. अब हमारी तलाश उन समाचार एजेंसीज की तरफ बढ़ी जिनपर पूरी दुनिया भरोसा करती है, और उसके बाद जो सच निकलकर आया, वो कुछ इस तरह है,


लाहौर से लगभग 40 मील की दूरी पर पाकिस्तान में एक गाँव है इतानवाला. ये इलाका पाकिस्तानी पंजाब के बेहद खूबसूरत, उपजाऊ और हरे- भरे इलाकों में शुमार है. यहाँ आस- पास फलों के ढेरों बागीचे नज़र आते हैं. और इन्ही बागीचों में काम करती हैं गाँव की महिलायें. आसिया नूरीन भी इन्ही बागीचों में काम करने जाती थीं.

जून की चिलचिलाती धूप से भरी एक दोपहर थी. आसिया नूरीन गाँव की दूसरी महिलाओं के साथ एक बागीचे में फालसे इकट्ठे कर रही थीं. गर्म दोपहर में उन्हें काम करते हुए घंटों हो चुके थे. प्यास से सभी के गले सूख रहे थे और शरीर थक चुके थे. आसिया नूरीन कुछ दूसरी महिलाओं के साथ सुस्ताने के लिए बैठ गईं.


रिपोर्ट्स की मानें तो किसी ने आसिया को पास के कुएं से पानी लाने को कहा. आसिया खुद भी प्यासी थीं इसलिए वो पानी लाने गईं, और पानी लाते वक़्त उन्होंने खुद भी उस जग से थोड़ा पानी पी लिया. आसिया ईसाई धर्म की महिला थीं. अल्पसंख्यक थीं. और उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के जग से पानी पीकर भारी गुनाह कर दिया था.


पाकिस्तान के बहुत से कट्टर मुस्लिमों का मानना है कि जो मुस्लिम नहीं है, वो अशुद्ध है, नीच है, और उसका जूठा पानी पीने से वो भी अशुद्ध हो जायेंगे. यही वज़ह है कि वहाँ मौजूद कट्टर महिलाओं को आसिया का जग से पानी पीना अच्छा नहीं लगा. उन्होंने आसिया को भला बुरा कहा. उन्होंने कहा कि तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था.
आसिया ने कहा,


“मुझे लगता है कि ईसा मसीह इस काम को पैगम्बर मोहम्मद से अलग नज़र से देखेंगे”

आसिया ने एक अल्पसंख्यक ईसाई होकर मुस्लिमों के जग से पानी पिया था, ये एक गुनाह कम था क्या जो उन्होंने दूसरा गुनाह कर दिया, ईसा मसीह और पैगम्बर मोहम्मद की तुलना कर के?

मामला बहस तक पहुँच गया. सारी मुस्लिम महिलायें एक होकर आसिया के खिलाफ हो गईं. आसिया से कहा गया कि अब अगर उन्हें मुक्ति पानी है तो उन्हें इस्लाम क़ुबूल करना होगा. लेकिन आसिया ने जब साफ़ इनकार किया तो, घटना के करीब पांच दिन बाद आसिया के घर पर पाकिस्तान की पुलिस ने धावा बोल दिया. पुलिस ने आसिया को बताया कि उनपर ईशनिंदा का इलज़ाम लगा है. उन्होंने पैगम्बर मोहम्मद का अपमान किया है.

आसिया के घर के बाहर इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ जमा हो गयी थी. पुलिस ने जब आसिया को जबरन खींचकर बाहर निकाला तो कट्टरपंथियों की इस भीड़ ने आसिया पर हमला कर दिया. भीड़ ने पुलिस के सामने ही आसिया को मारा. जैसे- तैसे आसिया को वहां से निकाला गया और उनपर ईशनिंदा का मुकदमा चला.


अदालत ने साल 2010 में आसिया को मौत की सज़ा सुना दी. जी हां! मौत की सज़ा, पाकिस्तान में ईशनिंदा करने वालों के लिए उम्रकैद या फिर मौत की सज़ा ही मुक़र्रर है. और शायद यही वज़ह है कि बहुत बार निजी खुन्नस निकालने के लिए भी लोग सामने वाले पर ईशनिंदा का आरोप लगा देते हैं.


एक नेता और थे पाकिस्तान के सलमान तासीर. वो जब पंजाब के गवर्नर थे तो बहुत पहले उन्होंने आसिया से मुलाक़ात की थी. आसिया के साथ प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने राष्ट्रपति से अपील की कि आसिया को रिहा किया जाए. लेकिन इसके कुछ ही हफ्ते बाद उनके अपने ही बॉडीगार्ड 26 साल के पुलिस कमांडो मालिक मुमताज हुसैन कादरी ने सरे- बाज़ार बिलकुल नज़दीक से उनपर 27 गोलियां दागकर उनकी ह्त्या कर दी.


उसने गर्व से कहा “ईशनिंदा करने वालों की सज़ा मौत ही है, और उसे कोई अफ़सोस नहीं है कि उसने सलमान की हत्या की.” अपने इस बयान के बाद वो जनता का हीरो बन गया था. कानूनन उसे फांसी की सज़ा हुई थी और उसकी फांसी के बाद उसके जनाज़े में हज़ारों की भीड़ उमड़ी.


पाकिस्तान एक ऐसी जगह है जहाँ ईशनिंदा का आरोप लगना मतलब सबकुछ बर्बाद हो जाना. क्योंकि आरोप बस एक पर लगता है, और कट्टरपंथी जीना उसके पूरे परिवार का हराम कर देते हैं. उसके परिवार पर कभी भी हमला कर दिया जाता है. उसके बच्चो को कोई अपने बच्चों के साथ खेलने नहीं देता, बात तक नहीं करने देता. परिवार को हर वक़्त डर लगा रहता है असुरक्षा का. वो एक तरह से अपने ही घरों में कैद होकर रह जाते हैं, और उनकी आज़ादी बस नाम बनकर रह जाती है.


आसिया का परिवार भी यही सब झेल रहा था. उसके परिवार को काम तक मिलना बंद हो गया. उसके परिवार को घर छोड़ दूसरी जगह बसना पड़ा. लेकिन कमाई ना होने के बाद भी उसका परिवार आसिया को रिहा करवाने की कोशिश करता रहा. और करीब 9 साल जेल में बिताने के बाद साल 2018 में आसिया नूरीन को सुप्रीम कोर्ट से रिहाई का आदेश मिला.


सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा फैसला देकर हजारों कट्टर मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई थी. आखिर कौर्ट ऐसा कैसे कर सकता है? संविधान को इतना अधिकार कहाँ? यही वज़ह थी की हज़ारों की यह भीड़ फैसला आने के कुछ ही घंटों बाद सड़कों पर उतर आई. सुप्रीम कोर्ट और आसिया के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने लगी. और हर तरफ बस एक ही बात गूंजने लगी,


“आसिया को मौत की सज़ा दो…!”

सडकें बंद कर दी गईं. गाड़ियां फूंक दी गई. तोड़- फोड़ हुई. पुलिस अधिकारियों पर हमला किया गया. सड़कों पर चलना तक दूभर हो गया था. यकीन कीजिए कि माहौल में फ़ैली ये हिंसा इतनी बढ़ी कि यही वज़ह रही जो सरकार को डरकर, जनता की सुरक्षा के चलते स्कूलों और बाज़ारों को बंद करवाना पड़ा. हर तरफ बस खौफ़ का माहौल था.


एक राजनीतिक पार्टी है पाकिस्तान में “तहरीक- ए- लबैक पाकिस्तान” जिसका मुखिया है खादिम हुसैन रिजवी. उस पार्टी ने जमकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध किया और हिंसा को बढ़ावा दिया. उसकी पार्टी की तरफ से फतवा जारी कर दिया गया आसिया को रिहाई देने वाले जजों को मार देने का.

पार्टी ने पाकिस्तान की सेना को भड़काने के लिए यहाँ तक बात फैला दी गयी कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख इस्लाम को त्याग चुके हैं. पार्टी के बाहर मौजूद लोग भी खादिम हुसैन रिजवी और उसकी पार्टी को समर्थन देने लगे. रिजवी ने कहा कि पश्चिमी देश पैसा और संरक्षण देकर इस्लाम की खिलाफत करवाते हैं.

उसकी पार्टी ने जमकर सरकार का विरोध किया. हाईवे जाम कर दिया. इस 3 दिनों के विरोध के चलते पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 20 दिनों से ज्यादा यातायाट ठप पड़ा रहा. आखिरकार पाकिस्तान सरकार को भी हार माननी पड़ी, और उसे तहरीक- ए- लबैक पाकिस्तान से सुलह करनी पड़ी.

सुलह के बाद भीड़ हटी. कोर्ट में एक याचिका दायर की गयी कि आसिया की आज़ादी का फैसला बदला जाए और उसके देश छोड़कर जाने पर भी पाबंदी लगाई जाए. आसिया को जेल से रिहा किया गया और तुरंत फिर से हिरासत में ले लिया गया. और आसिया बीबी को तीन महीने और हिरासत में बिताने पड़े.

ऐसे माहौल के बीच भी आसिया बीबी ने हार नहीं मानी. उन्होंने ना तो अपनी छोड़ी और ना ही अपना धर्म. वो सच में एक सशक्त महिला बनकर हमारे सामने आई हैं. हमारी चौपाल टीम उनकी हिम्मत और उनके जज्बे को सलाम करती है.

देखिये हमारा वीडियो: