पीएम मोदी के इस ‘दांव में फंस’ गये अरविन्द केजरीवाल?

दिल्ली के लोगों के लिए हर चुनाव में एक मुद्दा होता है कि अनाधिकृत कालोनियों को नियमित किया जाए. अभी तक ये मुद्दा सिर्फ चुनावी मुद्दा बनकर रह गया था. हालाँकि ये मुद्दा अब चुनावी वादों से गायब होकर हकीकत बनने जा रहा है. दिल्ली वालों का सालों पुराना सपना अब पूरा होने जा रहा है. मोदी सरकार ने दिल्ली में आनाधिकृत कालोनियों को नियमित कर एक बड़ा चुनावी पासा फेंका है. जो आम आदमी पार्टी के लिए नई टेंशन है.

एक तरफ जहाँ अरविन्द केजरीवाल चुनाव के नज़दीक आते ही बस सेवा फ्री, बिजली फ्री, और अब वाई फाई फ्री का एलान कर रहे है. उसे तो साफ़ पता चलता है कि पार्टी अब चुनाव मैंदान में उतरने की पूरी प्लानिंग कर चुकी है. वहीँ दूसरी तरफ मोदी सरकार ने अपने दुसरे कार्यकाल के कुछ ही महीनों में दिल्ली की अनाधिकृत कालोनियों को नियमित कर एक बड़ी चाल चल दी है. दिल्ली की राजनीति समझने वाले कम से कम यही मान रहे है.

कुछ दिन पहले ही मोदी सरकार ने एलान किया था कि दिल्ली की अनाधिकृत कालोनियों को नियमित करने का फैसला कैबिनेट ने ले लिया है. इसके बाद संसद सत्र के शुरू होने का इन्तजार किया जा रहा था क्योंकि इससे जुड़ा एक बिल सदन में पेश करना और पास कराना था. हालाँकि संसद सत्र के पहले दिन ही आम आदमी पार्टी के सभी सांसदों ने संसद के बाहर खड़े होकर प्रदर्शन करते देखे गये. उनका कहना था कि मोदी सरकार ने सिर्फ एलान किया है लेकिन इसे जुड़ा कोई बिल लोकसभा या राज्यसभा में नही लाया जाएगा. मतलब मोदी सरकार ने सिर्फ हवा हवाई बातें कर रही है .

हालाँकि अब लोकसभा के साथ साथ राज्यसभा में भी इस बिल को पास कर दिया गया है. अब लोगों को रजिस्ट्री कराने का इन्तजार है. केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था, ‘आज दिल्ली की आबादी दो करोड़ से अधिक है. 11 साल पहले साल 2008 में भी कोशिश हुई थी, दिल्ली सरकार काम को लटका रही थी. 2018 में बोले की दो साल और चाहिए. अब लगा कि इस पर केंद्र सरकार को ही कदम बढ़ाने होंगे. 

आपको बता दें कि केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद एक साथ दिल्ली में रहने वाले 40 लाख लोगों को फायदा मिलने वाला है. हालाँकि केजरीवाल सरकार भी बस, लाइट के बाद अब फ्री वाई फाई देने का एलान भी कर दिया है लेकिन केंद्र सरकार का फैसला कहीं न कहीं केजरीवाल सरकार को चिंतित जरूर करता है.

आपको बता दें कि अनाधिकृत कालोनियों के नियमित होने के बाद सरकार इन कॉलोनियों को वहां सारी बुनियादी सुविधाएं जैसे बिजली, पानी, स्कूल, अस्पताल की व्यवस्था करेगी. इस बिल का उद्देश्य जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी, वसीयत, बेचने, खरीदने और कब्जे संबंधी दस्तावेजों को मान्यता देना है. इसके तहत इनके निवासियों को एक बार में इन सभी मामलों में छूट मिलेगी. इसके अलावा बिल अंतिम लेनदेन पर पंजीकरण शुल्क और स्टांप शुल्क की भी सुविधा देगा और सर्किल रेट से कम शुल्क के कारण आयकर देनदारी के मुद्दे को भी संबोधित करेगा.

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