वोट देने के लिए अरविन्द केजरीवाल अब खिला रहे हैं शपथ!

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लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद अब अरविन्द केजरीवाल विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गये हैं. तैयारियां कैसी चल रही हैं ये भी आपको जरूर जानना चाहिए और देखना चाहिए कि कैसे अरविन्द केजरीवाल अब दिल्ली के लोगों को कसम दिलाएंगे? आइये हम आपको पूरा मामला समझाते हैं. आप भी समझिये और देखिये कैसे दिल्ली की सरकार विधानसभा चुनाव में जीत पाने के लिए अब किस हद तक पहुँच गयी है.
दरअसल आम आदमी पार्टी के बागी एमएलए और पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने ट्वीटर पर दो तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि 21 जून से 24 जून हर माता पिता को स्कूल बुलवा कर केजरीवाल को वोट देने की कसम खिलवाने का लिखित निर्देश, दिल्ली के उपराज्यपाल और अरविन्द केजरीवाल इसे तुरंत रोकिए, ये सरकारी स्कूलों में गैरकानूनी हरकत हैं, अगर इसे नहीं रोक गया तो हमें कोर्ट जाना पड़ेगा.


आइये हम अब आपको बताते हैं कि आखिर जो तस्वीरें हैं उसमें है क्या.. दरअसल दिल्ली सरकार की तरफ दिल्ली के स्कूलों को लिखित निर्देश दिया गया है कि स्कूलों में बच्चों के अभिभावकों को बुलाया जाये और बदलावव के बारे में बताया जाए. उन्हें भी यह भी बताया जाए कि अगर दिल्ली में केजरीवाल सरकार दुबारा नही आई तो आपके बच्चों की जिन्दगी ख़राब हो जाएगी, जैसी तमाम तारह की बातें कही गयी है. ये सब तो ठीक है लेकिन इसी के साथ यह भी पूछा गया है कि आप वोट किसे देंगे? आपने केजरीवाल को वोट क्यों नही दिया? सवाल ये भी है कि क्या आप वोट केजरीवाल को देंगे, अगर अभिभावक कहता है कि हाँ तो आपसे अगला सवाल पुछा जाएगा कि बदल तो नही जाओगे? कसम से? मतलब एक तो स्कूलों का उपयोग अरविन्द केजरीवाल अपने राजनीति के लिए कर रहे हैं और दूसरा वे लोगों को कसम खिला रहे हैं.


इसी के साथ एक और ट्वीट कपिल मिश्र ने किया इसमें उन्होंने एक टीचर द्वारा कहीं गयी बातचीत का कुछ अंश है. कपिल मिश्रा ने लिखा, ये एक टीचर ने मुझे व्हाट्सएप किया है- टीचर्स को जबर्दस्ती स्कूल बुलवाया गया है, टीचर्स फ़ोन करके पेरेंट्स को बुलाएंगे. अगले चार दिनों में हर पेरेंट्स के साथ एसएमसी मेंबर मीटिंग करेगा और केजरीवाल को वोट देने की कसम खिलवाई जाएगी. स्कूलों में इतनी भद्दी राजनीति कभी नहीं हुई.
अब इसमें मामले को लेकर कपिल मिश्रा दिल्ली के उपराज्यपाल से मुलाकात कर इसकी शिकायत करेंगे और अगर फिर इस मामले पर कार्रवाई नही तो तो वे कोर्ट भी जा सकते हैं.
अब यहाँ सवाल ये हैं कि आखिर केजरीवाल सरकार सरकारी स्कूलों को अपनी राजनीति के लिए क्यों इस्तेमाल कर रही हैं? सरकार स्कूलों में राजनीति और चुनाव से जुड़े सवाल क्यों पूछे जा रहे हैं? सरकारी स्कूलों में बच्चों के अभिभावक से ये क्यों पुछा जा रहा है कि उन्होंने वोट किसे दिया और और वे वोट किसे देने वाले हैं? अभिभावकों को कसम दिलाकर सवाल क्यों पूछा जा रहा है? अगर अरविन्द केजरीवाल की सरकार ने दिल्ली में काम किया है तो उन्हें ये सब करने की जरूरत क्या है? क्या मजबूरी है ये सब करने की ?


दरअसल केजरीवाल को विधानसभा चुनाव की चिंता सताने लगी है. इसी चिंता में केजरीवाल कुछ ऐसे फैसले ले रहे हैं जो उन्हें विवादों में लाकर खड़ा कर रही हैं. केजरीवाल के सामने चुनौती है कि वे कैसे अपनी सरकार बचाएंगे. लोकसभा चुनाव में केजरीवाल को एक भी सीट नही मिली. सीट तो छोडिये, उम्मीदवारों की जमानत भी जब्त हो गयी.. इसके बाद महिलाओं को मेट्रो में फ्री सफ़र का चुनावी एलान कर महिलाओं को तो खुश कर दिया था लेकिन महिलायें केजरीवाल की इस चाल को बखूबी समझती हैं. और अब दिल्ली के स्कूलों को राजनीती और चुनाव के इस्तेमाल कर रहे हैं केजरीवाल साहब!


लेकिन कपिल मिश्रा जो कभी केजरीवाल के साथ रहते हैं, उनकी सरकार में मंत्री थे उन्होंने केजरीवाल के इस फैसले को लेकर मोर्चा खोल दिया है.