अरुण जेटली ने अपने बच्चों की तरह ही अपने नौकरों के बच्चों को भी पढ़ाया लन्दन में

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बीजेपी नेता और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली न केवल पार्टी में बल्कि विपक्ष में भी अच्छी पकड़ रखते थे. अरुण जेटली अपने स्टाफ के जीवन को भी अच्छा बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते थे और अपने स्टाफ से भी उसी सम्मान के साथ बात करते थे जेसे किसी नेता या अपने परिवार वालों के साथ करते थे. सभी कर्मचारियों को वो अपने परिवार का हिस्सा ही मानते थे. वो उनकी हर चीज़ का बखूबी ख्याल रखते थे चाहे वो उनकी दवा के लिए हो या किसी जरुरी काम के लिए.

अरुण जेटली ने एक नीति बना रखी थी जिसके तहत उनके कर्मचारियों के बच्चे वहीं पढ़ते है जिस स्कूल में उनके बच्चे पढ़े है. इस स्कूल का नाम कार्मल कॉन्वेंट स्कूल है जो चाणक्यपुरी में स्थित है. इसके अलावा अगर किसी कर्मचारी का बच्चा विदेश में पढ़ने का इच्छुक होता था तो उसे पढ़ने के लिए वहीं भेजा जाता था जहां उनके बच्चे पढ़ने गए थे. अरुण जेटली आर्थिक तंगी में भी पढ़ने वाले बच्चों से बेहद प्रभावित होते थे. जब कभी भी वह किसी प्रतिभावान बच्चे को देखते तो उसकी हर मुमकिन मदद करने की कोशिश में जुट जाते थे.

अरुण जेटली वित्तीय प्रबंधन में सावधानी बरतते थे. अपने बच्चों को पॉकेट मनी और स्टाफ को वेतन भी भी चेक में देते थे. जेटली परिवार के खान-पान की पूरी व्यवस्था देखने वाले जोगेंद्र की दो बेटियों में से एक लंदन में पढ़ रही हैं. सांसद में जेटली के साए की तरह साथ रहने वाले गोपाल भंडारी का एक बेटा डॉक्टर और दूसरा बेटा इंजीनियर बन चुका है. जेटली ने 2005 में उनके सहायक रहे ओपी शर्मा के बेटे चेतन को लॉ की पढ़ाई के चलते अपनी 6666 नंबर की एसेंट कार गिफ्ट दी थी. उन्होंने वकालत की प्रैक्टिस के समय ही मदद के लिए वेलफेयर फंड बना लिया था. इस खर्च का प्रबंधन वो एक ट्रस्ट के जरिए करते थे.