अरुण जेटली : भाजपा के संकट मोचक जो सदन में वकीलों की तरह विपक्ष की धज्जियाँ उड़ाते

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पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली नहीं रहे. 66 साल की उम्र में एम्स में उनका निधन हो गया. वो लम्बी बिमारी से पीड़ित थे. अरुण जेटली ने कभी कोई लोकसभा चुनाव नहीं जीता लेकिन भाजपा के क्राइसिस मैनेजर कहलाये. छवि ऐसी थी कि राजनितिक विचारधारा के परे कई दलों में उनके दोस्त थे.

अरुण जेटली की राजनीति लुटियन के गलियारों में परवान चढ़ी लेकिन उस राजनीति के गुर उन्होंने छात्र जीवन में ही सीख लिए थे. 1974 में वो दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए. 1975 में जब देश में आपातकाल लगा तो अरुण जेटली अपने नारायणा वाले घर के आंगन में सोए हुए थे. पुलिस जब उन्हें गिरफ्तार करने आई तो वो घर के पिछले दरवाजे से निकल गए. अगले दिन उन्होंने सुबह साढ़े दस बजे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के करीब 200 छात्रों को दिल्ली विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर के दफ़्तर के सामने जमा किया. प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी का पुतला फूंका और एक भाषण दिया. अरुण जेटली को गिरफ्तार कर लिया गया.

जन जेटली गिरफ्तार हुए तो उन्हें तिहार के उसी सेल में रखा गया जिसमे वाजपेयी और आडवानी जैसे दिग्गज बंद थे, ये सेल जेटली के राजनीति जीवन की बुनियाद बनी. आपातकाल के बाद जब देश में चुनाव हुए तो वाजपेयी जाचते थे जेटली भी जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ें लेकिन उस वक़्त उनकी उम्र चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र से 1 साल कम थी.

जेल से निकल कर जेटली ने अपनी वकालत की पढाई पूरी की. 1989 में जब वीपी सिंह की सरकार बनी तो मात्र 37 की उम्र में उन्हें देश का अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल बनाया गया. उस वक़्त जेटली देश के चोटी के वकील  थे. उन्होंने आडवाणी के पक्ष में पहले बाबरी मस्जिद विध्वंस का केस लड़ा. आडवानी को उन्होंने जैन हवाला केस में भी सफलतापूर्वक आडवाणी को बरी कराया.

साल 2000 में ‘एशियावीक’ पत्रिका ने जेटली को भारत के उभरते हुए युवा नेताओं की सूची में शामिल किया था. साफ़ छवि के जेटली के दोस्त हर फील्ड में थे. मीडिया, राजनीति, क्रिकेट, सिनेमा और बिजनेस में उनके दोस्तों की संख्या अनगिनत थी. क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग और पत्रकार शेखर गुप्ता की बेटी की शादी की शादी जेटली के घर से ही हुई.

1995 में जब नरेंद्र मोदी दिल्ली आये तो अरुण जेटली से उनकी दोस्ती हुई. गुजरात दंगा केस में अरुण जेटली ने अदालत में नरेंद्र मोदी की तरफ़ से वकालत की थी. अरुण जेटली को पुरानी दिल्ली की स्वादिष्ट जलेबियाँ, कचौड़ी और रबड़ी फ़ालूदा बहुत पसंद रहा. भाजपा के वो प्रमुख रणनीतिकारों में से एक रहें.