कश्मीर से ये नेता हुए नजरबंदी से मुक्त

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जम्मू कश्मीर हमारे देश को एक अलग पहचान देता हैं. जम्मू कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत की सीमा जाती हैं और इस सीमा में आने वाले सभी नागरिक भारत के नागरिक हैं. कश्मीर घाटी लोगो को अपनी और आकर्षित करती हैं. वहां जाने वाले शैलानी के लिए कश्मीर स्वर्ग से कम नहीं हैं.  लेकिन काफी सालों से कश्मीर घाटी को विशेष राज्य का दर्जा मिलने की वजह से भारत का कोई भी नागरिक जम्मू कश्मीर में जाकर न तो नौकरी कर सकता था ना ही वहां कोई जमीन खरीद सकता था. लेकिन पिछले साल 5 अगस्त 2019 को मोदी सरकार ने कश्मीर घाटी से अनुच्छेद 370 को हटा दिया. जिसके बाद विपक्ष ने इसका विरोध किया.

कश्मीर घाटी से अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद इसके विरोध में कुछ कश्मीर के नेताओं को नजरबंद किया गया था. जिसमे से कुछ नेताओं को रिहा कर दिया गया हैं.  जिसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अब्दुल मजीद लारमी, गुलाम नबी भट्ट, डॉ. मोहम्मद शफी और मोहम्मद यूसुफ भट्ट शामिल हैं इसके अलावा कुछ दिनों पहले भी इन नेताओं से पहले कुछ नेताओं को रिहा कर दिया था जिनको नजरबन्द रखा गया था. जिसमें रिहा किए गए नेताओं में हाजी अब्दुल रशीद, नजीर अहमद गुरेजी, मोहम्मद अब्बास वानी और पूर्व मंत्री अब्दुल हक खान, अल्ताफ कालू, शौकत गनई और सलमान सागर, पीडीपी के नेता निजामुद्दीन भट्ट और मुख्तार बंध हैं.

लेकिन इन सभी नेताओं के अलावा अभी 17  नेता और नजरबन्द हैं जिनमे पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के नाम शामिल हैं. बटा दें इन सभी नेताओं को अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद नजरबन्द कर हिरासत में लिया गया था और कश्मीर घाटी को मिले विशेष राज्य के दर्जे को भी खत्म किया गया था. इसी के साथ मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया था.