आज कश्मीर पर जो हुआ उसे इस तरह समझिये

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5 अगस्त 2019, ये दिन याद कर लीजिये क्योंकि ये दिन आज इतिहास में दर्ज हो गया .जिस ऐतिहासिक दिन का 70 सालों से लोगों को इंतज़ार था वो दिन आज 5 अगस्त 2019 को आ ही गया . जिस धारा 370 की वजह से एक ही देश में दो संविधान और दो क़ानून बन गए थे उस धारा 370 को आज ख़त्म कर दिया गया या यूँ कहें कि जो गलती 70 साल पहले हुई थी उस गलती को आज पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने सुधारा .

नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने वो किया जिसकी ख्वाहिश तो सबके दिलों में थी लेकिन उम्मीद किसी को नहीं थी . इस जोड़ी ने देश का इतिहास बदल दिया देश का भूगोल बदल दिया .और ये साबित किया कि अगर इच्छाशक्ति हो तो कोई काम मुश्किल नहीं . आइये आपको बताते हैं कैसे बदला देश का इतिहास और भूगोल .

गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर का पुनर्गठन विधेयक 2019 राज्य सभा में पेश किया और कश्मीर से धारा 370 को हटाने का संकल्प पेश किया . इसके तहत जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश में बांट दिया गया है. जम्मू-कश्मीर का पहला हिस्सा जम्मू-कश्मीर ही होगा. ये दिल्ली की तरह एक केंद्र शासित प्रदेश होगा. यहां पर एक विधानसभा होगी. अबतक जम्मू-कश्मीर के साथ रहने वाला लद्दाख अब अलग केंद्र शासित प्रदेश हो गया है. लद्दाख में विधानसभा नहीं रहेगी.

अब देश के किसी भी हिस्से का कोई भी नागरिक कश्मीर में अपनी जमीने खरीद सकेगा, अब अगर कश्मीरी लड़कियां देश के किसी अन्य हिस्से में रहने वाले लड़के से शादी करती है तो उसके अधिकार ख़त्म नहीं होंगे . अब से देश के किसी भी हिस्से में रहने वाले लोग कश्मीर में नौकरी के लिए जा सकेंगे और कश्मीर का भी राष्ट्रीय झंडा तिरंगा ही होगा .

एक हफ्ते पहले से ही जब केंद्र सरकार ने घटी में सुरक्षाबलों की संख्या बढानी शुरू की थी तभी सबको अंदाजा हो गया था कि कुछ बड़ा होने वाला है लेकिन क्या होने वाल है इसका अंदाजा किसी को नहीं था . दिनों दिन घाटी में सुरक्षाबलों की संख्या बढती गई और साथ ही साथ 70 सालों से कश्मीर को सुलगा कर उसकी आच पर अपनी सियासी रोटियां सेंकने वाले नेताओं के माथे पर शिकन भी बढती है . सबको अंदाजा हो रहा था कि सरकार कुछ करने वाली है लेकिन ये किसी को अंदाजा नहीं हो पा रहा था कि सरकार क्या करने वाली है , अमरनाथ यात्रा बीच में ही रोक दी गई, तीर्थ यात्रियों को एयरफ़ोर्स के ग्लोबमास्टर c-16 विमानों के जरिये कश्मीर से बाहर निकाला गया, पर्यटकों को तुरंत कश्मीर से बाहर निकल जाने को कहा गया . कॉलेज बंद कर होस्टलों में रह रहे बाहरी छात्रों को अपने घर जाने को कह दिया गया .

सबकी टेंशन बढती जा रही थी . किसी अनहोनी की आशंका कश्मीरियों को होने लगी थी लेकिन सरकार ने किसी को कानो कान खबर नहीं होने दी कि वो क्या करने वाली है क्योंकि इन सुरक्षा उपायों के बीच राज्य में चुनाव कराने का शिगूफा भी छोड़ दिया गया था .

रविवार 4 अगस्त, देर रात राज्य में इंटरनेट सेवा और टेलीफोन सेवा बंद कर दी गई, कई इलाकों में धारा -144 लागू हो गई . महबूबा मुफ़्ती, उमर अब्दुल्ला और सज्जाद लोन जैसे कश्मीरी नेताओं को नज़रबंद कर दिया गया . कश्मीर में डर का माहौल था लेकिन देश के बाकी लोगों ने लोगों ने समझ लिया कि सोमवार की सूरज एक नया सवेरा ले कर निकलेगा, नयी उम्मीद ले कर निकलेगा . सोमवार 5 अगस्त की सुबह सूरज निकला तो घाटी में कर्फ्यू लगा दिया गया था . लोगों को अपने घरों में रहने की हिदायत दी गई . श्रीनगर में मरघटी सन्नाटा पसरा था तो दिल्ली सियासी गहमागहमी से तप रही थी . अल सुबह कैबिनेट की बैठक बुलाई गई और फिर वो निर्णय लिया गया जिसकी उम्मीद और इंतज़ार करते करते आँखें पथरा गई .. इस दिन की राह देखते हुए कई कश्मीरी पंडित दुनिया से विदा हो गए . कई पीढियां गुजर गई .

देश की कई पार्टियों ने सरकार के इस फैसले पर उसका साथ दिया है, उन पार्टियों ने भी समर्थन दिया जिनसे उम्मीद नहीं थी , बसपा, सपा, AIADMK, बीजू जनता दल. YSR कांग्रेस, आम आदमी पार्टी ये सभी पार्टियाँ सरकार के साथ खड़ी हैं लेकिन देश की को आज़ाद कराने का दम भरने वाली पार्टी जिसने कश्मीर को दो हिस्सों में बाँट दिया, जिस पार्टी की सरकार कश्मीर को UN ले कर गई, जिस पार्टी ने एक देश में ही दो देश नामा दिए वो कांग्रेस पार्टी इस फैसले के विरोध में कड़ी है और संविधान का कला अध्याय बता रही है .

अरे संविधान का काला अध्याय तो वो था जब एक देश में ही दो संविधान लागू कर दिए गए थे, काला अध्याय तो वो था जब रातों रात वहां के बाशिंदों को उनके घरों से खदेड़ दिया गया था . सालों साल सिर्फ अपने वोट बैंक के लिए इन दलों ने कश्मीर को जलाया है … अब कश्मीर में नयी सुबह आएगी .