अर्नब गोस्वामी केस की सुनवाई के दौरान देखिये कोर्ट में क्या क्या हुआ दिन भर

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अर्नब गोस्वामी से सम्बन्धी मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब गोस्वामी को राहत तो दे दी. लेकिन उससे पहले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई सुनवाई में दोनों पक्षों की और से जोरदार दलीलें दी गई. अर्नब गोस्वामी की तरफ से मुकुल रोहतगी कोर्ट में उपस्थित हुए जबकि महाराष्ट्र सरकार की तरफ से कपिल सिब्बल, राजस्थान सरकार की ओर से मनीष सिंघवी और छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा पेश हुए. विवेक तन्खा ने तो अर्नब गोस्वामी को प्रतिबंधित करने की मांग की लेकिन जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि वह खुद भी मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ हैं.

महाराष्ट्र सरकार की तरफ से पेश हुए वकील कपिल सिब्बल ने तो कोर्ट ने राहुल गाँधी का जिक्र किया. उन्होंने कहा, ‘अवमानना के एक मामले में राहुल गांधी निचली अदालत में पेश होते हैं, जबकि अर्णब को अदालत में पेश होने में दिक्कत महसूस होती है. याचिकाकर्ता अर्नब गोस्वामी को आखिर ये छूट क्यों मिलनी चाहिए?’ सिब्बल ने तो अर्नब पर ये भी आरोप लगाये कि ‘अर्णब न्यूज़ चैनल को मिले लाइसेंस का दुरूपयोग कर रहे हैं. न्यूज़ चैनल के नाम पर किसी को कुछ भी बोलने की इजाज़त नहीं दी जा सकती है, अर्णब ने ब्रॉडकास्ट लाइसेंस का उल्लंघन कर सम्प्रदायिक उन्माद फैलाया.’

सिब्बल के आरोपों पर जवाब देते हुए मुकुल रोहतगी ने कहा कि अर्णब के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जो मामले दर्ज किये हैं, उनमें छत्तीसगढ़, राजस्थान और महाराष्ट्र कांग्रेस शासित प्रदेश हैं. खास बात यह है कि अर्णब के बयान से कथित तौर पर जिसकी मानहानि हुई है, दरअसल में उसे ही शिकायत करना चाहिए था, लेकिन इन मामलों में ऐसा नहीं हुआ है और एक जैसे ही 16 एफआईआर दर्ज कराई गई हैं.

तमाम दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब गोस्वामी को राहत देते हुए 3 हफ़्तों की मोहलत दे दी. डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम आर शाह की खंडपीठ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये की गयी सुनवाई के दौरान अर्णब की याचिका पर सभी छह राज्य सरकारों को नोटिस जारी किए.