आतंकियों की सारी गतिविधियों पर पूरा कंट्रोल , सेना की रणनीति ने दिखाया असर

386

हमारी सेना लगातार आतंक के खिलाफ एक्शन ले रही है, और पुलवामा हमले के बाद तो एक्शन में और बढ़ोतरी आई है ..क्यों की अब आतंकवाद के खिलाफ हिंदुस्तान जंग छेड़ चूका है..और इस जंग में हमारी सेना पीछे नहीं हटने वाली नहीं है .. सेना ने अपने ऑपरेशन ऑल आउट के तहत कश्मीर में आतंक की राह पर जाने वाले वालों पर लगाम लगाने और नए युवको को आतंक की राह पर जाने वाली नई पैदावार को रोकने के लिए सेना की एक्शन रणनीति ने काम कर दिखाया है ..सेना ने अपने ऑपरेशन आल आउट के तहत आतंकियों के जनाजे पर भीड़ कम करने में और उसमें उनके साथियों की भाषणबाजी पर भी लगाम लगाया है ..जिससे घाटी में आतंकियों का रिक्रूटमेंट भी कम हुआ… पहले हम आपको बताते है ऑपरेशन आल आउट के बारे में ..ऑपरेशन आल आउट आतंकियों के खात्मे के लिए और उनकी आतंकी गतिविधियों को जड़ से ख़तम करने के लिए चलाया जा रहा है…पहले कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई पर राजनीति भारी पड़ रही थी…लेकिन ऑपरेशन ऑलआउट से अब राजनीति आउट हो गई है। अब सुरक्षाबल बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे है..

अब आप सोच रहे होंगे कि सेना को ऑपरेशन आल आउट कि जरूरत क्यों पड़ी.. आतंकी सेना और पुलिस पर हावी होते जा रहे थे.. क्यों की कश्मीर का दक्षिण इलाका पीडीपी यानि पीपुल्‍स डेमोक्रेटिक पार्टी और जमातिया इस्लाम का गढ़ है.. यह इलाका पूरी तरह से आतंकवाद ग्रस्त था और आतंकी इसमें बहुत हावी हो गए थे क्योंकि राजनीतिक हस्तक्षेप था लेकिन अब सेना और पुलिस पूरी तरह से आजाद हैं.. वह आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए ..और इस कारवाही के चलते ये सामने आया है, सेना के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक पिछले साल नवम्बर और दिसम्बर के आंकड़ों से इस साल जनवरी में आतंकियों के रिक्रूटमेंट में और कमी आई और आतंकी अपने साथ 3 नए युवाओं को ही जोड़ पाए.. फरवरी में आतंकियों की कोशिश बिल्कुल नाकाम रही और फरवरी से अबतक कोई भी युवा नया आतंकी नहीं बना है पर पिछले साल 214 युवाओं ने आतंक की राह पकड़ी थी.

भाषणबाजों पर लगाम

आप सबने देखा ही होगा कि आतंकी युवाओं को बरगलाने के लिए अपने ही साथियों में से किसी को मोटिवेटर के तौर पर तैयार करते हैं.. ये मोटिवेटर्स यानि (भाषणबाज) जगह-जगह जाकर युवाओं के दिमाग में जहर घोलने का काम करते थे..उनको भड़काने का काम करते है ..उनको आतंकवाद कि तरफ खीचते है ..उनको मजहव के नाम पर आतंकी बनने पर मजबूर करते है ..आपको बता दे .. घाटी में कुछ महीनों पहले तक करीब 25 ऐसे भाषणबाज थे, जिनमें से करीब 18 भाषणबाजों को हमारी सेना ने अलग-अलग मुठभेड़ में मार गिराया है ..और बाकी भाषणबाज वहां से भाग गए..सेना के द्वारा इन पर लगाम लगने से युवाओं के आतंक की राह पर जाने में कमी आई है.. साथ ही किसी आतंकी के जनाजे में जुटी भीड़ को भी आतंकी अपना संभावित साथी मानते हैं.. उन्हें वहां उकसाते हैं और आतंक का साथ देने के लिए कहते हैं.. सुरक्षा बलों ने पिछले कुछ वक्त में जनाजों में जुटने वाली भीड़ कम करने के लिए भी कई कदम उठाए हैं.. जिसका असर दिख रहा है.. चलिए आंकड़ों के द्वारा आपको समझाते है .. कि घाटी में कब कितने नए आतंकी बने

2014 में – 63
2015 में – 83
2016 में- 84
2017 में- 128
2018 में- 214
2019 में अबतक- 3
कब कितने आतंकी ढेर हुए
2014 में- 104
2015 में – 101
2016 में – 141
2017 में – 213
2018 में – 254
2019 अब तक – 44

जो हमारी सेना ने कहा था कि आतंकवाद से कोई समझौता नही करेंगे..तो इसका परिणाम आज हम देख ही रहे है कि अपनी तरफ से सेना और सरकार हर वो मुमकिन कोशिश कर रही है जिससे आतंक वाद और उसकी गतिविधियों को जड से ख़तम कर दिया जाये..सरकार ने सेना के हाथ खोल दिए है ..शायद यही वजह है कि अब घाटी में सेना और भी मजबूत होती जा रही है और आतंकवाद ख़त्म