सेना की एक छूट से आतकी इतना बड़ा हमला करने में हो गये सफल? पाकिस्तानी मीडिया की शर्मनाक हरकत

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कश्मीर में आतंकवादियों ने सीआरपीएफ की टीम पर हमला किया.. 40 से अधिक जवान शहीद हो चुके हैं… देशवासियों का खून उबल रहा है… जवाबी कार्रवाई और बदला लेनें की मांग की जा रही..लेकिन यहाँ सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर जवानों की सुरक्षा में इतनी बड़ी गलती कहाँ हुई… कैसे ये आतंकी सेना के काफिले के इतने करीब पहुँच गये… और उस काफीले पर हमला करने में कामयाब हो गये जिसमें कम से कम 2500 जवान शामिल थे.
गलती तो हुई हैं…और इसी गलती का फायदा उठाकार आतंकियों ने हमारे जवानों की जान ले लेली… जानते क्या चूक हुई …बस इतनी सी कि सेना ने कश्मीर की आवाम की सहूलियत सोची… उनकी परेशानी को ध्यान में रखा… भरोसा किया…
क्या सेना का कश्मीरी लोगों के लिए छूट देना ही भारी पड़ गया? क्या सेना पर पत्थर बरसाने वालों पर जब सेना ने थोड़ी नरमी क्या बरती सेना पर जानलेवा हमला हो गया?


आतंकी घटना को लेकर सीआरपीएफ का कहना है कि उन्‍होंने अपने काफिले के रूट पर पूरी सावधानी बरती थी। हालांकि, सीआरपीएफ ने यह जरूर माना कि जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग के एक हिस्से को आम नागरिकों यानी सिविलियन के वाहनो को गुजरने की अनुमति देना घातक साबित हुआ….सीआरपीएफ ने ग्रेनेड हमले या अचानक से होने वाली फायरिंग को लेकर काफी सतर्कता दिखाई थी और रूट की पूरी तरह से जांच की थी। रोड ओपनिंग पार्टी यानि आरओपी ने गुरुवार सुबह पूरे रूट की जांच की थी। उस रूट पर कहीं पर भी आईईडी नहीं पाया गया था। इस बात की संभावना भी नहीं छोड़ी गई थी कि कोई जवानों के काफिले पर फायरिंग कर सके या ग्रेनेड फेंक सके।’


सीआरपीएफ के अधिकारीयों से मिली जानकारी के मुताबिक़ जैश-ए-मुहम्मद का आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद कश्मीरी नागरिकों को दी गई आजादी का इस्तेमाल करते हुए एक सर्विस रोड से जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर आया… बता दें कि इससे पहले जब भी सुरक्षाबलों का काफिला चलता था तो इसमें किसी भी सिविल गाडी को नही जाने दिया जाता लेकिन पिछले कुछ समय से कश्मीर के हालात सुधरे थे और जवान कश्मीर को अपने कंट्रोल में लेने में कुछ हद कामयाब हुए थे.. ऐसे में सुरक्षाबलों के काफिले के बीच में या आगे-पीछे सिविल गाड़ियां भी चलती रहती हैं, जो खतरनाक साबित हुआ.


इसके साथ ही सवाल खड़ा किया जा रहा है कि आखिर जब सेना की एक टुकड़ी में 1000 जवानों को ही शामिल किया जाता है तो इसमें 2500 जवानों को क्यों शामिल किया… इसे बड़ी लापरवाही मानी जा रही हैं… लेकिन सीआरपीएफ के मुताबिक़ पिछले कुछ दिनों से भारी बर्फ़बारी हो रही थी जिसके चलते हाईवे बंद हो गया था. और जवानों को श्री नगर नही भेजा सका था.. ऐसे में मौसम साफ़ होते ही सभी जवानों को एक साथ श्री नगर भेजने का फैसला लिया गया…
हालाँकि जवानों के लिए सिविलियंस को छूट देना ही सबसे बड़ी भूल साबित हुई हैं इसी का फायदा उठाकर आतंकी सेना के काफिले के करीब पहुंचे और अपने खतरनाक इरादों को कामयाब करने में सफल भी हुए… हालाँकि माना तो यह भी जा रहा है कि बिना कश्मीरी लोगों के मिलीभगत के इस घटना को अंजाम तो नही दिया जा सकता.. ऐसे में क्या सच में कश्मीरी लोगों की सहूलियत के लिए सोचना ही हमारे जवानों पर भारी पड़ गया?….


वहीँ अब दूसरी तरफ पाकिस्तान अपनी शर्मनाक हरकतों से बाज नही आ रही हैं. पाकिस्तान मीडिया में घटना को अंजाम देने वाले आतंकियों को फ्रीडम फाइटर बताया जा रहा हैं. आतंकी घटना के बाद अक्सर पाकिस्तान की तरफ से इस तरह की ख़बरें मिलती ही हैं, हालाँकि ये बात भी जगजाहिर हैं कि आतंकियों के सरगना पाकिस्तान में ही हैं जो इस तरह की घटनाओं का हमला करने के लिए जिम्मेदार है.