जनसंख्या नियंत्रण पर झूठ क्यों फैला रहीं हैं आरफा खानम

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इस देश में कई अर्से बाद किसी प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले जैसे बड़े मंच से जनसंख्या जैसे गंभीर मुद्दे पर बात की.
लेकिन द वायर हिंदी की पत्रकार आरफा ख़ानम को प्रधानमंत्री की जनसंख्या को नियंत्र में लाने की बात अच्छी नहीं लगी. उनका मानना है कि जिस तरह पीछे कई दशकों से हमारी जनता ये मानती आ रही है कि जनसंख्या वृद्धि से हमे ही फायदा होगा, जितने हाथ उतना काम. आरफा ने इस वीडियो में इशारों इशारों में प्रधानमंत्री के आबादी के विस्फोट वाले बयान को खारिज़ किया है और बताया है कि भारत मे आबादी सन्तुलित है.

अगर आप न्यूज़ से थोड़ा बहुत भी updated रहते होंगे तो आपको तो ये बात मालूम ही होगी कि भारत आने वाले समय में दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन जाएगा.

अभी आपको ये कोई गंभीर बात नहीं लग रही होगी, क्योंकि भारत में जनसंख्या वृद्धि को हमेशा से शक्ति प्रदर्शन के रूप में दिखाया गया है. देखिए, इसमे कोई दो राय नहीं है कि जनसंख्या ज़्यादा होने से देश और विकसित होता है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण भारत और चीन है जो कि दुनिया के दो सबसे ज़्यादा आबादी वाले देश है और सबसे ज़्यादा तेज़ी से प्रगति कर रहे हैं.

लेकिन इस सिक्के का एक और पहलू भी है जिससे अभी तक हम रूबरू नहीं हो पाए हैं. हमारे पड़ोसी देश चीन ने जिस रफ़्तार से बुलंदियों को छुआ है, उसी रफ़्तार से वो नीचे भी गिरेगा. आपको पता होगा चीन दुनिया का सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश है, ज़ाहिर सी बात है एक समय था जब चीन में भी आज के भारत की तरह युवा आबादी सबसे ज़्यादा थी. एक वक्त उनके पास भी सबसे ज़्यादा युवाओं की आबादी थी जैसे जैसे आबादी बढ़ी , देश की कार्य क्षमता भी बढ़ती गयी. लेकिन आबादी की ही गती से किसी भी देश में उपजाऊ जमीन और नौकरियों को नहीं बढ़ाया जा सकता. एक समय आता है जब पूरी आबादी के लालन पोषण के लिए ज़रूरी अनाज भी कम पड़ने लगता है. जब चीन को आने वाली दिक्कतों का आभास हुआ तो उन्होंने one child policy का गठन किया, जिसके तहत कोई भी दंपत्ति एक से ज़्यादा बच्चे नहीं पैदा कर सकता.

अब आने वाले समय मे चीन में एक के बाद एक 40 से 50 प्रतिशत वर्किंग क्लास एक दो सालों में एक झटके में रिटायर हो जाएगा. उस वक्त चीन में कमाने वाले कम और खाने वाले रिटायर्ड लोग ज़्यादा बढ़ जाएंगे. Population demography को समझने के लिए आप इस पिरामिड पर ध्यान दें ये आम तौर पर ऐसा दिखना चाहिए यहां सबसे ज़्यादा संख्या नवजात शिशुओं की और सबसे कम वृद्ध लोगों की होंगी चाहिए

आने वाले सालों में चीन की population demography कुछ ऐसी नज़र आएगी. यहां सबसे ज़्यादा संख्या वृद्धों की है और सबसे कम बच्चों की

फिलहाल भारत का डेमोग्राफिक पिरामिड कुछ इस तरह का दिखता है यहां युवा सबसे ज़्यादा हैं बच्चे और वृद्ध दोनों की संख्या नियमित है, लेकिन आने वाले समय मे ये चीन जैसा दिखने लगेगा और तब इस देश के विकास में तमाम बाधाएं आने लग जाएँगी.

अगर हम चाहते हैं कि ऐसा ना हो तो हमे अपनी जनसंख्या को नियमित करना होगा. इस तरह की कोशिश चीन कर चुका है लेकिन वो उसमे ज़्यादा सफल नहीं रहा. अब उस पर अचानक जरूरत से ज़्यादा ही कम हो जाने का खतरा हैं.

इन तमाम चीजों को देख ये बात तो साफ है कि इस देश मे जनसंख्या नियंत्रण कानून जरूर बनना चाहिए.

अब वापस आते हैं आरफा जी पर उन्होंने मोदी सरकार पर महिला सशक्तिकरण को किनारे कर जनसंख्या का मुद्दा उठाया जो कि उनके मुताबिक जरूरी नहीं था. यहां हम आपको कुछ याद दिलाना चाहेंगे
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, 24/7वोमेन्स हेल्पलाइन, उज्वला योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, स्वाधार ग्रह योजना, नारी शक्ति पुरस्कार, राज्य महिला सम्मान ,ज़िला महिला सम्मान, Posco एक्ट.समे से किसी भी योजना का ज़िक्र अपने 2014 के पहले नहीं सुना रहा होगा. तो ये बात कहना कि मोदी सरकार ने अपने 5 साल के कार्यकाल में महिला शसक्तीकरण के लिए कुछ नहीं किया ये सरा सर गलत है.

आरफा ने पॉपुलेशन एक्सप्लोजन होने की बात को गलत साबित करने का पूरा प्रयास किया था अपने वीडियो में तो यहां भी हम डाटा शेयर करना चाहेंगे. इसे देख कर ये साफ हो जाएगा कि 21वी सदी आते आते हमारी जनसंख्या 1960 के मुकाबले 10 गुना बढ़ गयी है. और ये सबसे ज़्यादा 21वी सदी के आगमन पर हुई है. तो ये कहना कि population explosion नहीं हुआ या फिर ये बहुत पूरानी टर्मिनोलॉजी है, सारा सर गलत होगा.
आरफा अपनी बात को जस्टिफाई करने के लिए फर्टिलिटी रेट का हवाला देती है जो कि हर महिला पर सिर्फ 2 दशमलव है, यानी एक महिला केवल दो बच्चे ही पैदा कर रही है, लेकिन यहां एक बात पर गौर करना जरूरी है कि हमारी मेडिकल फसिलिटी में दिन ब दिन हो रही बेहतरी से तो बच्चे पैदा हो रहे हैं उनका मोर्टेलिटी रेट भी बढ़ रहा है जो कि पहले काम हुआ करता था इसके बढ़ने से जनसंख्या को बढ़ाने में मदद करेगा, ये रेट तब नार्मल होता अगर हमारे देश की आबादी पहले से ही 1.3 अरब ना होती तो. साथ ही अपनी बात को साबित करने के लिए उन्होंने कोई भी तथ्य पेश नहीं किए तो इन बात की कोई प्रामाणिकता नहीं है.

उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार पर ये भी आरोप लगाया कि उनका मानना है कि मुसलमान दंपत्ति ज़्यादा बच्चे पैदा करते है, यहां आपको कुछ आंकड़े हम भी बताना चाहेँगे the hindu की एक report के मुताबिक 2050 में भारत में मुसलमानों की आबादी सबसे ज़्यादा होगी, आरफा ने कहा था कि भारत मे एक औरत औसतन 2.4 बच्चे पैदा करती है लेकिन उन्होंने बड़ी ही चतुराई से ये बात छुपा ली कि इस देश में मुस्लिम औरतों का avg fertility rate 3.1 है. यानी कि वो ज़्यादा बच्चे पैदा करती हैं. बड़ी दुख की बात है कि इस बात को स्वीकारने की जगह वो इसे झुठलाने में लगी हुई हैं.

इस देश मे जनसंख्या नियंत्रण कानून आने से हमारी आबादी नियमित रूप से विस्तार करेगी जिससे हमारे ही देश को आगे चल के फायदा होगा और आने वाली दिक्कतों से निपटने की तैयार पहले ही जो जाएगी.