आदित्य ठाकरे की तुलना राहुल गाँधी से करने पर माफ़ी मांगने की क्या जरूरत थी?

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मशहूर पत्रकार अंजना ओम कश्यप इन दिनों चर्चा में है, सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल हो रही हैं और ट्रेंड भी कर रही हैं. वजह आप सबको मालूम है और अगर नहीं मालूम तो बता देते हैं कि अंजना का एक clip वायरल हो रहा है जिसमे उन्होंने आदित्य ठाकरे को शिवसेना का राहुल गाँधी बताया. वैसे ये अंजना ने जानबूझ कर नहीं किया. बल्कि गलती से न्यूज पढने के दौरान माइक म्यूट करना भूल गईं और आपसी बातचीत में ये चैनल पर टेलीकास्ट हो गया.

खैर ट्रेंड और ट्रोल होने के बाद उन्होंने आदित्य ठाकरे से माफ़ी मांग ली. लेकिन सवाल ये है कि आखिर अंजना ने ऐसा क्या कह दिया कि उन्हें माफ़ी मांगनी पड़ गई. उन्होंने आदित्य ठाकरे को कोई गाली तो नहीं दी. उन्होंने तो बस आदित्य की तुलना द ग्रेट राहुल गाँधी से की थी. अगर आप किसी को गदहा या बैल या उल्लू कहते हैं तो समझ आता है कि ये ऑफेंसिव है, गलत है. लेकिन अगर आप किसी को राहुल गाँधी जैसा कहते हैं तो इसमें क्या गलत है. राहुल गाँधी कोई गाली थोड़े ही न हैं. राहुल गाँधी न तो गदहा हैं, ना बैल हैं और न उल्लू है, जो किसी को राहुल गाँधी या राहुल गाँधी जैसा कह दिया जाये तो माफ़ी मंगनी पड़े.

राहुल गाँधी युवा हैं, युवराज हैं, पढ़े लिखें हैं, स्मार्ट हैं, हैंडसम हैं, किउट हैं, गालों पर प्यारा सा डिम्पल पड़ता है और देश की खातिर उन्होंने अपना परिवार भी नहीं बसाया. ऐसे महान व्यक्तित्व से तुलना होने पर तो किसी को भी अपने ऊपर गर्व होना चाहिए कि उसकी तुलना यंग ब्लड राहुल गाँधी से हो रही है.

अंजना ने कहा था, “लिख के रख लीजिये ये शिवसेना के राहुल गाँधी साबित होंगे.” तो उनका मतलब रहा होगा कि लिख के रख लीजिये, जैसे राहुल गाँधी के बिना कांग्रेस का काम नहीं चलता, जैसे राहुल और कांग्रेस दो जिस्म एक जान है वैसे ही आदित्य भी शिवसेना के लिए उतना ही जरूरी हो जायेंगे. जैसे राहुल की हैसियत कांग्रेस के युवराज की है वैसे ही आदित्य की हैसियत भी शिवसेना के राजकुमार जैसी होगी. आखिर दोनों यंग ब्लड हैं इस देश की राजनीति में.