छठवें चरण के बाद चुनावी विश्लेषण, कितनी बड़ी और घटी मोदी लहर ?

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लोकसभा चुनावों के 6 चरण पूरे हो चुके है आखिरी चरण के मतदान 19 मई को होंगे . छठे चरण में 64.58 % मतदान हुआ . अगर बात करें 2014 के लोकसभा चुनाव की तो 2014 में छठे चरण में 67.54 % मतदान हुआ था जो इस बार घट कर 64.58 प्रतिशत रह गया , यानी कि इस बार मतदान में 2.96 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की है .
हालांकि 2.96 % की गिरावट के बाद भी इस बार 2009 की तुलना में ज्यादा वोटिंग हुई है . अक्सर माना जाता है कि जब जनता ज्यादा संख्या में वोट देने के लिए हारों से बाहर आती है तो उसकी इच्छा बदलाव की होती है और कम वोटिंग को सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में माना जाता है .
तो चलिए हम आपको वोट % के हिसाब से समझाते है कि कितना वोट प्रतिशत बड़ा है 2014 से २०१९ तक 6TH फेज में
तो चलिए हम आपको वोट % के हिसाब से समझाते है कि कितना वोट प्रतिशत बड़ा है २०१४ सर २०१९ तक 6TH फेज में ,तो सबसे पहले हम बात करेंगे बिहार की
बिहार में 8 लोकसभा सीटों पर मतदान हुआ जिसमे से वाल्मीकिनगर, पश्चिम चंपारण पूर्वी चंपारण, शिवहर, वैशाली, गोपालगंज, सीवान और महाराजगंज लोकसभा क्षेत्र आते है अगर आप इसमें आंकड़ा देखे तो वोटिंग का % बड़ा ही है , अगर हम बात करे २००९ से २०१४ की तो ये आंकड़ा 12.49% बड़ा था, इस बढ़त के पीछे मोदी लहर को मना जा रहा था और अब भी ये आंकड़ा २०१४ से २०१९ तक 2.18% की बढ़त पर दिख रहा है..
इसी एक साथ अगर बात उत्तर प्रदेश की जाए तो यहाँ छठे चरण में 14 सीटें सुलतान पुर, प्रतापगढ़ फूलपुर, प्रयागराज, अम्बेडकरनगर, श्रावस्ती, डुमरियागंज, बस्ती,संतकबीरगंज लालगंज, आजमगढ़ जौनपुर, मछलीशहर और भदोही में ये वोट डाले गये.. अगर अवेरज देखा जाये तो यहाँ वोट प्रतिशत में 2009 की अपेक्षा 2014 में 8.92% की बढ़ोत्तरी हुई और 2014 की अपेक्षा 2019 में 0.42% की बढ़ोत्तरी हुई है. जबकि कुछ क्षेत्रों में इसमें कमी भी आई है इसमें सुल्तानपुर, प्रयागराज, श्रावस्ती, डुमरियागंज, बस्ती और आजमगढ़ शामिल हैं. सबसे ज्यादा अन्तर प्रयागराज में देखने को मिला जहाँ पिछली बार की अपेक्षा इस बार -2.77% वोटिंग हुई है.
अब अगर बात करें पश्चिम बंगाल की तो , छठे चरण में पश्चिम बंगाल की 8 सीटों पर मतदान हुआ . ये आठ सीटें थी कुमतुल, मेदिनीपुर, पुरुलिया, झारग्राम, बांकुरा, बिष्णुपुर, कांठी और घटल . मतदान के दौरान भारी हिंसा भी लोगों को घरों से बहार आने से नहीं रोक सकी . छठे चरण में बंगाल में 84.50 फीसदी वोटिंग हुई . अगर 2009 से तुलना करें तो 2019 में 2.24 प्रतिशत ज्यादा वोटिंग हुई जबी 2014 के मुकाबले 0.46 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई जो बहुत ही मामूली है .
पश्चिम बंगाल की 42 सीटों पर कब्जा करने के लिए यूँ तो लड़ाई चार पार्टियों टीएमसी, लेफ्ट, कांग्रेस और भाजपा में है लेकिन मुख्य मुकाबले में तृणमूल और भाजपा ही दिख रही है . राजनीतिक हिंसा की खबरे भी इन्ही दोनों पार्टियों के बीच आ रही है . अब ये तो 23 मई को ही पता चलेगा कि बंगाल पर ममता का जादू चलता है या मोदी का ?

10 लोकसभा सीटों वाले राज्य हरियाणा में एक ही चरण में मतदान संपन्न हो गया . हरियाणा में 10 सीटों रोहतक, सिरसा, कुरुक्षेत्र, अम्बाला, करनाल, सोनीपत, गुडगाँव, फरीदाबाद, हिसार और भिवानी महेंद्रगढ़ में छठे चरण में वोट डाले गए .
हरियाणा में कुल 70.29 प्रतिशत मतदान हुआ . अगर 2009 से तुलना करें तो 2019 में वोटिंग 3.96 प्रतिशत ज्यादा हुई है . हरियाणा में 2009 में 67.48 प्रतिशत मतदान हुआ था . जबकि 2014 के मुकाबले 2019 में 1.15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई . 2014 में 71.44 प्रतिशत वोटिंग हुई थी .
हरियाणा में इस बार प्रधानमंत्री मोदी के अलावा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है . हरियाणा में इस बार आम आदमी पार्टी में मैदान में है . आम आदमी पार्टी ने JJP के साथ गठबंधन किया है .
अब हम बात करेंगे मध्य प्रदेश की जहाँ 8 लोकसभा सीटों पर चुनाव हुआ जिनमें मुरैना, भिण्ड, ग्वालियर, गुना, सागर, विदिशा, भोपाल और राजगढ़ है,mp में भी वोटिंग का % बड़ा ही है , अगर हम बात करे २००९ से २०१४ की तो ये आंकड़ा 9.98%बड़ा था ,और अब इसमें २०१४ से २०१९ तक 8.41%की बढ़त मिली.
पर इस बार चर्चा में सिर्फ एक ही सीट ज्यादा रही वो है भोपाल की जिस सीट पर सध्वी प्रज्ञा और दिग्विजय सिंह चुनाव लड़ रहे है,
वैसे भाजपा का गढ़ कही जाने वाली इस सीट से दिग्विजय को जिताने के लिए कम्प्यूटर बाबा यहां धूनी जलाकर सैकड़ों साधु-संतों के साथ हठ योग पर बैठे थे, बल्कि सुनने में तो यहाँ तक तंत्र-मंत्र का सहारा भी ले रहे हैं, खैर रिजल्ट तो 23 मई को सबके सामने आ ही जायेगा .
mp के बाद अब हम बात करेंगे देश की राजधानी दिल्ली की
राजधानी दिल्ली में रविवार को 7 लोकसभा सीटों पर वोट डाले गए, जिसमें नई दिल्ली, साउथ दिल्ली, चांदनी चौक,ईस्ट दिल्ली, नॉर्थ दिल्ली, वेस्ट दिल्ली,नॉर्थ वेस्ट दिल्ली , यहां की सात सीटों पर भाजपा, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। कांग्रेस ने इस बार दिल्ली में बहुत मेहनत की थी अपनी खोयी हुए जमीन वापस पाने के लिए ,पर अगर आंकड़ा देखें तो 2014 SE 2019 में वोट % गिरा ही है, आप यहाँ सीट में देख भी सकते है.
अगर हम बात करे मुद्दों की तो दा chaupal ने अपने स्तर पर सर्वे किया था जिसमे दिल्ली सरकार से कई मुद्दों पर लोग असहमत थे , .. और फिर लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में मुद्दे अलग अलग स्तर के होते हैं . जहाँ तक मतदान प्रतिशत में कमी का सवाल है तो हो सकता है रमजान और धूप और बढती हुए गर्मी के कारण भी मतदान प्रतिशत में आई हो .
विधानसभा ने लोगों म आदमी पार्टी को जिता कर सता सौंपी थी .भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी जबकि कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ हो गया था . जहाँ तक लोकसभा का सवाल है , भाजपा कपास रूप में एक चेहरा है जबकि आम आदमी पार्टी अभी उस स्थिति में नहीं पहुँच पाई है कि राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित कर सके .
दिल्ली के बाद हम बात करते है झारखण्ड की जहाँ 4 लोकसभा सीटें है ,गिरिडीह, धनबाद, जमशेदपुर और सिंहभूम, झारखण्ड की अगर हम बात करे तो २००९ से २०१४ की तो वोट % का आंकड़ा 15.02% बड़ा था, इस बढ़त के पीछे मोदी लहर को मना जा रहा था और अब भी ये आंकड़ा २०१४ से २०१९ तक 0.23% की बढ़त पर दिख रहा है.

तो ये थी 6TH PHASE के चुनाव के पूरी रिपोर्ट ,और इसे देख कर तो लग रहा है कि कुछ लोग अपनी ही जमीन पर सत्ता खोते नजर आ रहे है..तो कुछ इस बार एक अलग कहानी गढ़ सकते है .