दुश्मन है जमाना कपड़ों का

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“लाज, लज्जा, शर्म, तहज़ीब, संस्कार और बहुत कुछ लड़कियों के लिए मायने रखता है…. चाहे मन करे न करे लड़कियों को सब कुछ दुसरे के अनुशार करना चाहिए … तब ही लड़की सभ्य  कहलाती है… लड़कियों को हमेशा पुरे कपड़े  पहनने चाहिए … रात को यू आवारा जैसे नहीं घूमना चाहिए… सिगरेट बाबा रे … और शराब! तौबा-तौबा कभी भी नहीं… अगर लडकियां ये सब नहीं मानेंगी तो पक्का इनके साथ कुछ ना कुछ ज़रूर हो जाएगा… बहुत खराब … फिर ना वो खुद कहीं चेहरा दिखने लायक रह जाएंगी न माँ बाप को दिखने लायक छोड़ेंगी …”

 सुनने में अजीब लग रहा होगा ये सब… लग रहा होगा चौपाल वाले ये क्या बता  कर  रहे … लेकिन ये लाइन्स हमारे समाज का वो सच है जिसका सभी लड़कियों को हर दुसरे दिन सामना करना पड़ता है …

और ऐसा ही कुछ हुआ है दिल्ली  के एक resturant में जहां एक मिडिल age की एक औरत ने लड़कियों के पहनावे को लेकर बहुत खराब बात बोल दी… उस औरत ने यह कहा कि लड़कियों के छोटे कपड़ों की वजह से इनका रेप होता है… इस बात का बुरा उन लड़कियों को लगा और उन्होंने उनसे बात करने की कोशिश की लेकिन बात करने के मूड में नहीं थी आंटी … जब उन लड़कियों ने माफ़ी मांगने की बात की तो उस आंटी ने माफ़ी तो नहीं मांगी लेकिन हाँ उन बातों को फिर से बिना किसी गित के दोहराया.. शिवानी गुप्ता नाम  है उस लड़की का जिसके साथ ऐसा हुआ और उन्होंने इसका विडियो बना कर अपने फेसबुक प्रोफाइल पर शेयर किया….

Hey guys. Today my friends and I were harassed by a woman at a restaurant for me wearing a short dress. This middle aged woman you’ll see in the video addressed seven men at the restaurant to rape us because she felt we deserved it for wearing short clothes and bashing her unsolicited opinion. For speaking up against her primitive mindset. Our instinct was turn away from the drama but supported by our colleagues, we took her on at a shopping centre, nearby. We gave her the chance to apologise, to no avail, of course. Nothing moved the needle for her, not even another woman who learned the story on the spot and implored the ghastly woman to apologise. See for yourself. And share.

Posted by Shivani Gupta on Tuesday, April 30, 2019

जब हमने इस खबर पर थोड़ी  सी पड़ताल  शुरू की तो मालूम पड़ा की इन आंटी का नाम सोमा चक्रबर्ती है .. यह पेशे से एक music टीचर हैं… मतलब की आर्ट और कल्चर से जुड़ी… हमारा आर्ट कल्चर कभी भी ऐसी बातें नहीं करता … हिस्ट्री ऑफ़ इंडियन clothing को पढने की बहुत आवश्यकता है इनको…. एक शिक्षक की ऐसी सोच है तो फिर दूसरों से क्या उम्मीद रख सकते है..

 वैसे तो हमारे देश में  महिला आयोग और “फेमेनिस्ट मूवमेंट” बहुत एक्टिव रहती है…लेकिन क्या हर गली मोहल्ले की औरतों का मुह बंद करा पाती? क्या लड़कों का  गलत निगाहों से देखना बंद हो पता? अगर ऐसा होता तो हर दिन ऐसी  इंसिडेंट को फेस नहीं करना पड़ता लड़कियों को….

यह सोच के आज भी शर्म आती है कि कैसे सिर्फ कपड़ों की लंबाई लड़कियों के charecter को डिफाइन करती है … जिस देश में लड़कियों को लेकर ऐसी मानसिकता है उस देश की तरक्की  शायद ही कभी हो सकती है…

वैसे हम हमेशा लड़कों और मर्द जात को blame  करते है … पितृसत्ता को बढ़ावा देने का विरोध करते है … लेकिन इन औरतों कि सोच हमें यह सोचने के लिए मजबूर करती है कि हम जो लड़ाई लड़ रहे हैं वो किसके लिए … जब एक औरत ही हमारा charecter assasination करती है तो मर्दों से क्या अपेक्षा की जा सकती… ऐसी कहावत है कि  औरतें औरतों की दुश्मन होती है… पहले लगता था की ये सब बकवास सा है … ऐसा कुछ नहीं होता … लेकिन कुछ ऐसे लोग होते है जो women को अलग potrait करते है… जिनमें से एक example हमने विडियो में देखा …

खैर जबतक हमारी सोच नहीं बदलेगी तब तक लोगों की सोच कैसे बदलेंगे हम … कितना भी आवाज़ उठाए, कितना भी चीखे चिल्लाए, लेकिन ऐसी हरकते अंदर से झंझोर कर रख देती है … एक बात कहना चाहूंगी आपसे कि कपड़े  कभी कुछ गलत नहीं कराते… लोगों की सोच गलत करा जाती है…