राहुल बजाज के सवालों का जवाब खुद गृह मंत्री अमित शाह ने दिया है. देखिये क्या कहा

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बजाज ग्रुप के चेयरमैन राहुल बजाज अपने एक सवाल को लेकर सुर्ख़ियों में आ गये है. ये सवाल बजाज ने रेल मंत्री पियूष गोयल से पूछे थे. हालाँकि जिस कार्यक्रम में राहुल बजाज ने सवाल खड़ा किया है उस कार्यक्रम में अमित शाह और निर्मला सीतारमण भी मौजूद थे. दरअसल राहुल बजाज ने साल पूछते हुए कहा कि “देश में सरकार की आलोचना करने की किसी में हिम्मत नहीं है और ऐसे में हर तरफ डर का माहौल है.”

राहुल बजाज ने कहा कि ‘हमारे कोई भी उद्योगपति दोस्त इस बारे में बात नहीं करेंगे, लेकिन मैं आज यहां खुले तौर पर कहना चाहता हूं कि जब यूपीए-टू की सरकार थी, तब हमलोग किसी की भी आलोचना कर सकते थे. ऐसा ही माहौल फिर से बनाना होगा. आपकी सरकार अच्छा कर रही है, उसके बाद भी हम आपकी खुले तौर पर आलोचना नहीं कर सकते हैं. हमें ये विश्वास नहीं कि आप तारीफ करेंगे. हो सकता है कि मैं गलत हूं, पर सभी यही महसूस कर रहे हैं.” हालाँकि अब राहुल बजाज के सवालों पर चिंताओं पर खुद गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब दिया है.

राहुल बजाज को जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि किसी को डरने की जरूरत नही है. हम माहौल को और बेहतर करने की कोशिश करेंगे. ‘फिर भी आप जो कह रहे हैं कि एक एटमोसफेयर (माहौल) बना है, हमें भी एटमोसफेयर को सुधारने का प्रयास करना पड़ेगा. लेकिन मैं इतना जरूर कहना चाहता हूं कि किसी को डरने की जरूरत नहीं है. न कोई डराना चाहता है… न कुछ ऐसा करना है जिसके खिलाफ बोले तो सरकार को चिंता है. काफी पारदर्शी तरीके से ये सरकार चल रही है, और हमें किसी भी प्रकार की विरोध का कोई डर नहीं है. और कोई विरोध करेगा भी तो उसके मेरिट्स देख कर हम अपने आप को बेहतर करने का प्रयास करेंगे.’

हालाँकि राहुल बजाज यहीं नही रुके. उन्होंने लिंचिंग का जिक्र करते हुए कहा कि लिंचिंग , इंटॉरलेंस की हवा बनाती है. हम डरते हैं… कुछ चीज़ों को हम बोलना नहीं चाहते हैं. लेकिन अभी तक इस केस में किसी को कोई सज़ा नहीं मिली है.’   इसके जवाब में अमित शाह ने कहा कि लिंचिंग कोई नै चीज नही है और ये कहना भी गलत होगा कि किसी को सजा नही मिली है. लिंचिंग पहले भी होती थी और आज भी होती है. शायद आज पहले से कम होता है. पर ये भी ठीक नहीं है कि किसी को सज़ा नहीं मिली है. लिंचिंग वाले बहुत सारे केस चले और समाप्त भी हो गए. सज़ा भी हुई है, लेकिन मीडिया में छापते नहीं हैं.’