इस फैसले से भाजपा को मिलेगें ये फायदे

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राज्यसभा में आज गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर का पुनर्गठन विधेयक 2019 पेश किया जिसमें जम्मू कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 (1) के अलावा सभी खंडों को हटाने का प्रस्ताव पेश किया, और प्रस्ताव के अनुसार जम्मू कश्मीर को दो हिस्सों में बांट दिया जाएगा. अमित शाह ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में विधानसभा होगी लेकिन लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी. उन्होंने कहा कि यह कदम सीमा पार आतंकवाद के लगातार खतरे को देखते हुए उठाया गया. आज हम आपको बताएंगे कि धारा 370 को हटाने के बाद अमित शाह ने एक साथ कइ मामलों पर निशाना साधा है.

जम्मू कश्मीर की जिन 87 सीटों पर विधानसभा चुनाव होते हैं, उनमें से 37 सीटें जम्मू में आती हैं और 50 सीटें कश्मीर में आती हैं. 2014 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने जम्मू इलाके की 37 सीटों में से 25 सीटों पर जीत हासिल करी और राज्य में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होकर उभरी. ऐसे में लद्दाख के अलग केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बीजेपी का कद और बढ़ जाएगा.

वर्तमान सरकार और चुनाव आयोग अगर जनसंख्या के हिसाब से परिसीमन कराता है, तो मैदानी इलाके में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ेंगी. पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में जिस तरह जम्मू के लोगों ने बीजेपी के पक्ष में वोटिंग की थी उससे साफ है कि परिसीमन के बाद भारतीय जनता पार्टी जम्मू-कश्मीर में और मजबूती के साथ उभरेगी.

वैसे भी परिसीमन के लिए लंबे समय से मांग हो रही है. इसकी जरूरत इसलिए भी है क्योंकि जम्मू परिक्षेत्र में ज्यादा इलाका और ज्यादा जनसंख्या होने के बाद भी यहां विधानसभा सीटों की संख्या कम है.

जम्मू कश्मीर से धारा 370 को हटाकर मोदी सरकार ने अपना स्टैंड और ज्यादा साफ कर दिया है कि, वो राष्ट्रवाद के मुद्दे को लेकर कोई समझौता नही करेंगे. राष्ट्रवाद का मुद्दा लोगों को हमेशा लुभाता रहा है, और इस राष्ट्रवाद के मुद्दा से बीजेपी को आने वाले विधानसभा चुनावों में काफी फायदा होगा और विपक्षी पार्टियों का वोट बैंक और गिर जाएगा.

इससे पहले कांग्रेस और बीजेपी दोनों परिसीमन की मांग लंबे अर्से से कर रहे हैं. दोनों पार्टियों का कहना है कि 1995 में जो परिसीमन हुआ था उसके बाद से हालात काफी बदले हैं. दोनों इलाकों के प्रतिनिधियों को देखें तो क्षेत्रफल और जनसंख्या में बड़ा अंतर है, इसलिए चुनाव से पहले परिसीमन जरूरी है. साफ है लद्दाख के अलग होने और नए परिसीमन के बाद जम्मू क्षेत्र में विधानसभा सीटों की संख्या कश्मीर से ज्यादा होगी, जिसका फायदा बीजेपी को मिलने की उम्मीद करना गलत नहीं होगा.

प्रस्ताव के अनुसार जम्मू कश्मीर को दो हिस्सों में बांट दिया जाएगा. इन दोनों में भारतीय संविधान के सभी प्रावधान लागू होंगे. ऐसे में माना जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के पास अब वो विशेष अधिकार भी नहीं रहेंगे, जो उन्हें आर्टिकल 35A के तहत मिले हुए हैं. आर्टिकल 35A एक संवैधानिक प्रावधान है, जो जम्मू-कश्मीर विधानसभा को ‘स्थायी नागरिक’ की परिभाषा तय करने का अधिकार देता है. जम्मू-कश्मीर में स्थायी नागरिकों को कुछ विशेष अधिकार मिलते थे. जैसे कि राज्य में संपत्ति खरीदने का फायदा, राज्य की नौकरियों का फायदा, स्कॉलरशिप और योजनाओं का फायदा. लोकिन अब ये फायदे पूरे देश को मिल पाएंगे.