अमेठी में राहुल गाँधी की मुसीबत बढाने निकला ये युवक, स्मृति इरानी ने पहले ही उड़ा दी है नींद

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लोकसभा चुनाव सर पर हैं.. चुनाव प्रचार चल रहा है.. नेताओं के पार्टी अदलने बदलने का काम बड़ी तेजी से चल रहा है… टिकट मिल रहे हैं और टिकट कट भी रहे हैं… लेकिन कुछ लोगों को नींद उडी हुई है…. कई पार्टी और नेताओं की राजनीतिक करियर दांव पर लगा हुआ है… कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी जी वैसे तो अमेठी से चुनाव लड़ते हैं लेकिन ऐसी उडी उडी खबर मिल रही हैं कि कहीं और से भी चुनाव लड़ सकते हैं… अब वे ऐसा क्यों कर रहे हैं ये तो हम नही बता सकते लेकिन अमेठी में इस बार राहुल गांधी की मुश्किलें कम नही रहने वाली हैं. राहुल गांधी को अमेठी में इस बार काफी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है. मुसीबत सिर्फ अमेठी की नाराज जनता ही नही है, राहुल गांधी के खिलाफ दूसरी बार चुनाव लड़ने वाली स्मृति इरानी नही हैं बल्कि राहुल गाँधी के लिए अब एक और मुसीबत के तौर पर खड़े हो गये हैं. एक स्थानीय नेता का बेटा अब राहुल गाँधी के हुंकार भरने जा रहा है.. हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि यह परिवार गाँधी परिवार का करीबी ही नही बहुत करीबी रहा है. यह नेता हैं हाजी सुल्तान खान. ये ही पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के प्रस्तावक थे. अब इनके पुत्र हाजी हारून रशीद राहुल गाँधी के खिलाफ चुनाव लड़ने जा रहे हैं. मिली जानकारी के मुताबिक़ उन्हें पार्टी में हासिये पर डाल दिया गया था. हाजी हारून से जब अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने का कारण पूछा गया तो हारून ने कहा, ‘कांग्रेस का स्थानीय नेतृत्व लंबे समय से हमारी उपेक्षा कर रहा है. और इस वजह से क्षेत्र के साथ-साथ समुदाय का विकास में दिक्कतें आईं हैं.’ क्षेत्र में लगभग 6.5 लाख मुस्लिम मतदाता हैं और हम सभी कांग्रेस के खिलाफ मतदान करेंगे.’

हाजी हारून से जब अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने का कारण पूछा गया तो हारून ने कहा, ‘कांग्रेस का स्थानीय नेतृत्व लंबे समय से हमारी उपेक्षा कर रहा है. और इस वजह से क्षेत्र के साथ-साथ समुदाय का विकास में दिक्कतें आईं हैं.’ क्षेत्र में लगभग 6.5 लाख मुस्लिम मतदाता हैं और हम सभी कांग्रेस के खिलाफ मतदान करेंगे.’


राहुल गांधी को इस बार बीजेपी से स्मृति इरानी जोरदार जोरदार टक्कर दे रही हैं. अमेठी की जनता भी राहुल गाँधी से भी नाराज बतायी जा रही हैं जिसके चलते इस बार राहुल गांधी मुसीबत में हैं वहीँ गाँधी परिवार का काफी करीबी माने जाने वाला पारिवार भी अब राहुल गाँधी के खिलाफ खड़ा हो गया है.
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी ने साल 1980 में चुनाव जीता. उनकी मृत्यु के बाद, उनके बड़े भाई राजीव गांधी ने साल 1981 (उपचुनाव), साल 1984, साल 1989 और साल 1991 में सीट से चुनाव जीता. राजीव गांधी की हत्या के बाद , उनकी पत्नी सोनिया गांधी ने साल 1999 में चुनाव लड़ा और जीता. अब राहुल गाँधी इस सीट को संभाल रहे हैं… लेकिन अमेठी की हालात लगातर बिगड़ते जा रहे हैं… हो सकता है इसका दुष्परिणाम इस बार कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष को झेलना पड़ सकता है.
कांग्रेस पूरी ताकत लगा रही हैं कि कैसे जनता को लुभाया जाए. तमाम तरह के ऐसे एलान किये जा रहे हैं जिसे लागू कर आना बेहद मुश्किल दिखाई पड़ता है.. लेकिन समय तो चुनाव का है भैया… चुनाव मतलब वादे.. और वादे मतलब वादे..


पीएम मोदी को टक्कर देने के लिए पूरा विपक्ष साल दो साल पहले से ही एकजूट हो रहा था लेकिन अहम् चुनाव से पहले सब बिखरा बिखरा नजर आ रहा है. कांग्रेस के साथ कोई गठबन्धन करने को तैयार नही है सिवाय आम आदमी पार्टी के… आम आमदी पार्टी मतलब वही जो राजनीति बदलने आये थे और राजनीति के अनुसार खुद बदलते चले गये…खैर ये सब तो आप समझते ही हैं और अगर नही समझते तो हम आपको समझायेंगे… पर वोट डालने जरुर जाइएगा और ऐसे कैंडिडेट को वोट डालिए जो आपको एक मज़बूत सरकार दे सके..