चीन को कोरोना के चलते दुनिया से अलग-थलग करने में लगा हुआ है अमेरिका, जानिए अब क्या कर रहा है

कोरोना के लगातार बढ़ रहे प्रकोप के चलते लॉकडाउन को 3 मई तक के लिए आगे बढ़ा दिया गया है. पीएम मोदी ने देश को संबोधित करते हुए पहले तो लॉकडाउन के मायने बताये और फिर इसे आगे बढ़ाना ही सही समझा. पीएम मोदी ने आगे कहा कि अगर लॉकडाउन को न जारी किया गया होता तो स्थिति और भी बढ़ा रूप ले सकती थी. वहीँ भारत सरकार लगातार कोरोना के चलते कई देशों की मदद कर चुका है.

जानकारी के लिए बता दें कोरोना ने सबसे ज्यादा कहर अमेरिका में मचाया है. अमेरिका में इस समय कोरोना के 6 लाख से ज्यादा मरीज हैं जिसके चलते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. अमेरिका में हर दिन हजारों लोग अपनी जान दे रहे हैं. अमेरिका ने कई ख़ुफ़िया एजेंसी को कोरोना की जाँच में लगा दिया है कि आखिर ये फैला कहाँ से है और चीन को साफ़ चेतावनी दी है कि अगर इस वायरस को उसने जानबूझकर फैलाया है तो उसे अंजाम भुगतना पड़ेगा. अमेरिका अब चीन को दुनिया से अलग-थलग करने में लगा हुआ है.

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा है कि अमेरिका दूसरे देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है और उन्हें यह समझा रहा है कि इसकी उत्पत्ति वुहान से हुई है. अमेरिका ने कहा है कि वायरस कहाँ से आया है समझाने की जिम्मेदारी चीन की है. बेन शापिरो शो में शुक्रवार को कहा है कि चीन को इस वायरस के बारे में दिसंबर 2019 से ही पता था. उन्होंने कहा है कि ‘हमें अमेरिका में हुई मौतों और यहां जिस तरह के आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, उसके लिए जिम्मेदार पक्षों की जवाबदेही तय करनी होगी.’

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा है कि ‘कूटनीतिक तौर पर हम दुनियाभर के देशों से बात कर रहे हैं, सही कदम उठाने में, अर्थव्यवस्थाओं को फिर से खोलने में और यह सुनिश्चित करने में मदद कर रहे हैं कि सही समय आने पर अंतरराष्ट्रीय यात्राएं शुरू की जा सकें ताकि वैश्विक व्यापार शुरू हो सके.’ इसी के आगे उन्होंने कहा है कि ‘हम उन देशों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि उन्हें समझा सकें इस वायरस की उत्पत्ति चीन के वुहान में हुई और चीन की सरकार को इसके बारे में दिसंबर 2019 में निश्चित ही जानकारी थी, और एक राष्ट्र के रूप में वे अपने बुनियादी कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहे. यही नहीं, वे विश्व स्वास्थ्य संगठन के अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों का पालन करने में भी विफल रहे और उसके बाद इस सब को छिपाने के लिए उन्होंने बहुत कुछ किया.’ वहीँ इस महामारी से रक्षा करने में विश्व स्वास्थ्य संगठन भी असफल रहा है.