चीन के खिलाफ एकजुट हुए दुनिया भर के देश, सबक सिखाने के लिए सभी देशों ने लिया ये फैसला

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दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्थाएं कोरोना की वजह से डांवाडोल है. जबकि चीन अपने यहाँ कोरोना को काबू कर चुका है. इस स्थिति का फायदा उठा कर चीन अब बिजनेस अटैक करने लगा है. चीन की शुरू से ही वर्ल्ड पॉवर बनने की ख्वाहिश रही है. ऐसे में जब अमेरिका की अर्थव्यवस्था भी कोरोना की वजह से हांफ रही है तो चीन दूसरे देशों की कमजोरी का फायदा उठाकर उनकी कंपनियों को टेकओवर करने की फिराक में है. चीन की साजिश को भांप कर अब दुनिया भर के देश उसके खिलाफ एकजुट हो गए हैं और उसे सबक सिखाने की तैयारी कर रहे हैं.

पिछले दिनों पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (PBoC) ने भारत की सबसे बड़ी गैर बैंंकिंग होम लोन कंपनी एचडीएफसी में अपनी हिस्सेदारी 0.8 फीसदी से बढ़ाकर 1.01 फीसदी कर ली है. इससे पूरी दुनिया के कान खड़े हो गए. एक तरफ जहाँ पूरी दुनिया आर्थिक मंदी से जूझ रही है, चीन की कम्पनियाँ खरीदारी में लगी है. इसलिए सभी देशों ने चीन को रोकने के लिए ऐसा कदम उठाया है.

भारत सरकार ने भी चीन के इस साजिश की हवा निकालने के लिए अपने FDI नियमों को सख्त कर दिया. अब दुनिया के बाकी देश भी यही कदम उठा रहे हैं. यूरोपीय संघ से जुड़े देशों ने चीन के ‘बारगेन हंटिंग’ को रोकने के लिए FDI पर अंकुश वाले नियम लाए. जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्पेन सहित कई देशों ने अपने FDI नियमों को इतना सख्त कर दिया कि अब चीन सीधे उन देशों की कंपनियों को टेकओवर नहीं कर पायेगा. जर्मनी और स्पेन ने अपने FDI एक्ट में बदलाव करते हुए ये अनिवार्य कर दिया कि किसी को भी निवेश करने के लिए पहले सरकार से अनुमति लेनी होगी.

इटली कोरोना से बहुत प्रभावित है और पिछले कई हफ़्तों से लॉकडाउन झेल रहा है. जिस कारण उसकी अर्थव्यवस्था चरमरा गई है. इटली सरकार को इस बात का डर था कि उसकी खस्ताहाल कंपनियों को सस्ती कीमत पर विदेशी कंपनियां खरीद सकती हैं. इसलिए इटली सरकार गोल्डेन पावर लॉ ले कर आई जिसके अंतर्गत अब विदेशी कंपनियों को निवेश से पहले इटली की सरकार से मंजूरी लेनी होगी.

ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा ने भी चीन की साजिश को रोकने के लिए अपने यहाँ FDI नियमों में बदलाव किया है. किस वजह से चीन तिलमिला जाएगा. भारत के कदम पर तो चीन तुरंत भड़क गया था. दरअसल दुनिया के सभी देश चीन की महत्वकांक्षाओं से वाकिफ है.