क्या केजरीवाल और अखिलेश यादव इतने नासमझ हैं ?

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एक यूपी की रेस में कहीं,तो दूसरा दिल्ली की गद्दी पर बैठा है,

जनाब साइकिल वाला ही नहीं, झाड़ू वाला सीएम भी अनजान बना बैठा है…”

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल साहब अपनी बयानबाज़ी को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उनकी यह बयानबाज़ी सरकार द्वारा लागू की गई NRC के ऊपर है। 

अखिलेश भईया ने राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) को डराने की राजनीति करार दिया। जरूरत पड़ने पर उत्तर प्रदेश में भी एनआरसी लागू करने के मुख्यमंत्री योगी के बयान पर उन्होंने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश में एनआरसी लागू की गई तो सबसे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रदेश छोड़ना पड़ेगा क्योंकि वह उत्तराखंड के मूलनिवासी हैं।

वहीं दिल्ली की गद्दी पर बैठे केजरीवाल साहब भी अखिलेश भैया के सुर में सुर मिलाने लग गए। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने अतीत में कई मौकों पर मांग की है कि असम की तरह दिल्ली में भी NRC  को लागू किया जाना चाहिए। लेकिन दिल्ली में इस बारे में जब केजरीवाल साहब से पूछा गया तो उनका बयान ऐसा था मानों अखिलेश भैया से डिस्कस करके बोला हो। उनका कहना था कि NRC लागू होने पर मनोज तिवारी को दिल्ली छोड़ कर जाना पड़ेगा।

विपक्ष में रह कर सरकार पर तंज कसना जायज़ है लेकिन यह तंज और आलोचना लॉजिकल होना भी ज़रूरी है ।इस तरह की बयानबाज़ी और बड़बोलापन हमें सोचने पर मजबूर कर देता है कि आखिर यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिडनी में पढ़े अखिलेश भैया और IIT से पढ़े, एक्स IRS अफसर केजरीवाल, क्या सच में NRC  के फायदों से अनजान हैं या सब कुछ जान कर भी अनजान बनने का नाटक कर रहे हैं ? लगता है न तो उन्हें घुसपैठियों और नागरिकों में फर्क पता है और न ही इस बात का ज्ञान है की ये नेशनल रजिस्ट्री है, कोई स्टेट रजिस्ट्री नहीं। 

योगी और तिवारी ने NRC को लागू करने के पीछे कई लॉजिकल कारण दिए हैं ।घुसपैठियों के द्वारा किया गया क्राइम उसमे मुख्य है । लेकिन सोचने वाली बात ये है की NRC के खिलाफ बड़बोलेपन का प्रदर्शन करने वाले नेताओं के पास क्या कारण हैं ? लगता है दोनों ही नेताओं ने राजनीति का चश्मा इस कदर पहन लिया है कि उन्हें घुसपैठियों का फ्यूचर वोट बैंक ललचाने लगा है ।जिसके कारण वो देश हित्त में लिए गए फैसलों के खिलाफ भी बोलने लगे हैं।

केजरीवाल भले ही मनोज तिवारी पर तंज कस रहे हों, लेकिन दिल्ली के लिए दोनों सेम ही हैं । मनोज तिवारी ने बिहार में जन्म लेकर कामकाज  के सिलसिले में पहले मुंबई फिर दिल्ली को अपना ठिकाना बनाया ।वहीं अरविंद केजरीवाल का जन्म भी हरियाणा की है।दिल्ली के सीएम बनने से पहले तक वो यूपी के गाजियाबाद में रह रहे थे । उस हिसाब से तो अगर मनोज तिवारी को दिल्ली छोड़नी पड़ी तो केजरीवाल को भी छोड़नी पड़ेगी !

NRC राष्ट्र के लिए उठाया गया एक कदम है ,इस मुद्दे पर सभी पार्टियों को हाथ में हाथ मिलाकर सरकार का साथ देना चाहिए! NRC का प्रयोग अपने राजनैतिक लाभ के लिए करना सरासर गलत होगा ।