ये बाते साबित करती है कि महान नही बल्कि क्रूर शासक था अकबर

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साल था 1542 और तारीख थी 1542
अंधेरी रात का वक्त था तभी अमरकोट में राजा हुमांयू के यहां किलकरियाँ गूंजी। 
मिठाईयां बांटी जानी लगी क्योकि हमीदा बानो ने शहजादे को जन्म दिया था । पूरे महल में मिठाईयां बांटी जाने लगी। सब खुश थे, हुमायूं को भी अपनी सत्ता के लिए वारिस मिल गया था। परिवार की रजामंदी से इसका नाम रखा गया जलाललुदीन मोहम्मद।

अभी अकबर चीजो को सीख ही रहे थे कि उनके पिता की गिरने की वजह से मौत हो गई जिसके चलते छोटी सी उम्र में ही अकबर को सत्ता संभालनी पड़ी। बेरम खान ने अकबर को सत्ता की हर बारीकी सिखाई । अपने पिता के नक्शो कदम पर चलते हुए अकबर ने निरंकुशता के रास्ते अपनाया और पूरे भारत मे अपना राज कायम कर लिया।  
 नवम्बर 1556 को अकबर ने पानीपत की लड़ाई लड़ी,हिन्दू राजा हेमू की सेना ने मुगल सेना को  लगभग खदेड़ ही दिया था कि अचानक हेमू को आंख में तीर लग गया जिससे वो बेहोश हो गया ये सब देखकर उसकी सेना भाग गई और बेहोशी की हालत में हेमू को जब अकबर के सामने लाया तो अपनी बहादुरी दिखाने के फेर में अकबर ने हेमू की गर्दन काट ली। उसके धड़ को दिल्ली के दरवाज़े से लटकाके उसके सिर को काबुल भेज दिया गया। गैर हिन्दू की हत्या के चलते अकबर को गाजी के खिताब से नवाजा गया।

3 मार्च 1575 का दिन था और इस दिन दुनिया अकबर के खतरनाक रूप से अवगत हुआ थी।
अकबर ने बंगाल को जीत लिया था,इस जीत के बाद उसने इतने सैनिकों और नागरिकों को मरवाया की उनके कटे हुए सिरों की आठ मीनारे बनाई गयी थी। जब अकबर के हाथों शिकस्त खाए राजा दाऊद खान ने मरते समय पानी मांगा तो उसे  अकबर ने उसे अपने जूतों में भरके पानी पीने के लिए दिया था । 
सत्ता के नशे में चूर अकबर पूरी तरीके से निरंकुश हो चुका था। अपनी मजबूत सेना के दम पर अकबर ने चित्तौड़ को जीत लिया ,जश्न में सराबोर होकर अकबर ने 8000 राजपूत योद्धाओ को बंदी बना लिया। कैदियों को खूब सताया गया और बाद में बड़ी बेदर्दी से मौत के घाट उतार दिया गया

समय बीतने के साथ साथ अकबर की हरकते खराब होती गयी वो हर रोज पीकर आता और अपने जीते हुए राज्यो की महिलाओं को अपनी हथियारों के दम पर अपना गुलाम बनाता। वो अपने धर्म को लेकर बहुत कट्टर था उसने  किसी भी मुगल महिला को हिन्दू शासकों से शादी नही करने दी लेकिन उसके राज में ही 38 राजपूत राजकुमारियां मुगल घराने में ब्याही गई। ना जाने ऐसी कितनी हिन्दू लड़कियां रही जिनसे हथियारों के बल पर उसने सम्बंध बनाए और अपनी हरम में शामिल कर लिया। ना जाने कितनी महिलाएं अकबर के चलते जौहर करने को मजबूर हो गई।

1564 साल था। अकबर को अपने से लगभग 18 साल बड़ी गोंडवाना की विधवा रानी दुर्गावती पंसद आ गई, अपना गुलाम बनाने के लिए उसने उनपर हमला करवाया लेकिन दुर्गावती बहादुर निकली और उसके कब्जे में नही आई और अपने अस्मत को बचाने के लिए उन्होंने अपने छाती में छुरा घोंपकर आत्महत्या कर ली।

समाज की भलाई की बात कहके अकबर ने सतीप्रथा पर रोक तो लगवाई लेकिन इसके पीछे का उसका मकसद हिन्दू नारियों के पति को मरवाकर उनको सती होने से रोककर अपने हरम में डालकर अय्याशी करना था।
भारतीय इतिहास के सबसे क्रूरतम शासकों में शामिल अकबर को पेचिस हुआ और वो इससे कभी उभर ही नही पाया। 1605 में अकबर दुनिया को अलविदा कह गया ।