चौबीस घंटों बाद अजीत पवार ने तोड़ी चुप्पी, कही ये बड़ी बात

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चाचा से रूठ कर चले गए भतीजे अजीत पवार को मनाने की सभी कोशिशें नाकाम हो गई. जिस भतीजे को उंगली पकड़ा कर चाचा ने राजनीति के गुर सिखाये उस भतीजे को मनाने के लिए शरद पवार ने तमाम कोशिशें की लेकिन अजीत पवार ने साफ़ कर दिया कि वो अब इतने आगे निकल आये हैं जहाँ से पीछे लौटना मुमकिन नहीं.

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद २४ घंटों तक अजीत पवार ने चुप्पी साधे रखी तो सबके मन में ये सवाल उठने लगे कि क्या अजीत पवार अपने फैसले पर पछता रहे हैं? क्या अजीत वापस अपने चाचा के पास लौटेंगे लेकिन अजीत ने चौबीस घंटों बाद चुप्पी तोड़ कर सारे सवालों के जवाब दे दिए. सबसे पहले तो अजीत पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्वीट कर धन्यवाद दिया.

उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आपका शुक्रिया. हम महाराष्ट्र में स्थायी सरकार सुनिश्चित करेंगे, जो महाराष्ट्र की जनता के कल्याण के लिए कठिन परिश्रम करेगी”. उसके बाद उन्होंने भाजपा के उन सभी मंत्रियों को ट्वीट कर धन्यवाद देना शुरू किया जिन्होंने उपमुख्यमंत्री बनने के बाद अजीत पवार को बधाइयाँ और शुभकामनाएं दी थी.

अमित शाह, जेपी नड्डा, पियूष गोयल, स्मृति इरानी, निर्मला सीतारमण, रामदास अठावले सभी को बारी बारी से अजीत पवार ने धन्यवाद दिया और अपने ट्विटर के बायो में भी डेप्युटी CM OF MAHARASHTRA लिख लिया.

लेकिन इन सबसे पहले शरद पवार ने भतीजे को मनाने की सारी कोशिशें की. एनसीपी के विधायक दल के नेता जयंत पाटिल ने अजित पवार से मुलाकात की और उनको मनाने का प्रयास किया, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली. अजित पवार का कहना है कि एनसीपी का हित बीजेपी के साथ महाराष्ट्र सरकार में शामिल रहने में ही है.

दूसरी तरफ भाजपा भी पूरी तरह से आश्वस्त है कि वो आराम से बहुमत हासिल कर लेगी. भाजपा मुख्यलाय में देवेन्द्र fadanvis ने अपने विधायकों से मुलाक़ात की. इस दौरान भूपेन्द्र यादव और पियूष गोयल जैसे बड़े नेता भी मौजूद थे. सबके चेहरे पर एक अलग तरह का कांफिडेंस झलक रहा था. इस मीटिंग के ख़त्म होने के बाद अजीत पवार भी एक्टिव हो गए और उन्होंने साफ़ कर दिया कि अब वापस लौटने का सवाल ही नहीं.

दूसरी तरफ तनाव भरे माहौल में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस ने अपने अपने विधायकों को समेट कर रखने की कोशिशें शुरू कर दी. सभी पार्टियाँ अपने अपने विधायकों को आश्वासन दे रही हैं कि घबराने की बात नहीं है, सरकार तो अपनी ही बनेगी. लेकिन एक डर सबके अन्दर है कि पता नहीं कौन पला बदल ले. महाराष्ट्र का सियासी खेल पल पल इतने रंग बदल रहा है कि सियासी पंडितों के माथे पर पसीने की बूँदें है. उन्हें भी समझ नहीं आ रहा कि हालात किस सेकेण्ड किस करवट बदलेंगे.