चाचा शरद पवार से क्यों नाराज हुए अजीत पवार, ये रहे बड़े कारण!

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महाराष्ट्र में सरकार बनने के बाद सियासी ड्रामा अब सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है. पहले किसी के पास बहुमत नही था इसलिए सरकार नही बन रही थी लेकिन अब जब सरकार बन गयी है तो महाराष्ट्र में सियासी तूफ़ान आ गया है..
दरअसल एनसीपी के नेता अजीत पवार ने विधायकों के समर्थन पत्र के साथ शनिवार सुबह बीजेपी को समर्थन देकर सरकार बना ली, लेकिन ऐसी क्या नौबत आ गयी है कि अपने शरद पवार को झटका देकर अजीत पवार ने बीजेपी को समर्थन देने का एलान कर दिया है. इसके पीछे कई कारण है. दरअसल कहा जा रहा है कि कई मुद्दे ऐसे थे इसकी वजह से अजीत पवार शरद पवार नाराज बताये जा रहे थे. आइये जानते है कि आखिर किन मुद्दों की वजह से शरद पवार और अजीत पवार के बीच खटपट थी और किस वजह से बीजेपी को समर्थन देने के लिए अजीत पवार तैयार हो गये!

सबसे पहला कारण ये है कि कांग्रेस शिवसेना और एनसीपी के समर्थन से सरकार बनने की स्थिति लगभग साफ़ हो गयी थी लेकिन उपमुख्यमंत्री के कुर्सी पर किसे बैठाया जाये इसे लेकर शरद पवार अजीत पवार को छोड़कर किसी और के नाम पर विचार कर रहे थे. ये भी एक वजह बतायी जा रही है कि अजीत पवार शरद पवार से नाराज थे और उन्होंने उपमुख्यमंत्री पद का ऑफर मिलने के बाद बीजेपी को समर्थन देने का एलान कर दिया और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले ली

दूसरा कारण ये है कि ख़बरों की माने तो अजीत पवार और सुप्रिया सुले के बीच कई मुद्दों अपर मतभेद चल रहे थे.. वहीँ शरद पवार अजीत पवार की जगह सुप्रिया सुले पर ज्यादा ध्यान दे रहे थे.. इसकी वजह से अजीत पवार, शरद पवार और सुप्रीय सुले से नाराज थे.. ये मनमुटाव विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट बंटवारे के दौरान खुलकर सामने आया था.

तीसरा कारण ये है कि महाराष्ट्र में जब विधानसभा चुनाव हुए तो अजीत पवार के बेटे पार्थ भी चुनावी मैदान में थे और इस चुनाव में पार्थ को करारी हार का सामना करना पड़ा था. अजीत पवार इस बात से नाराज थे कि एनसीपी से पार्थ को पूरा सर्मथन नही मिला. वहीँ शरद पवार अपनी परनाती को जिस तरह से राजनीति में उतारे, उस तरह से अजीत पवार के बेटे पार्थ की तरफ ध्यान नही दिया गया.


चौथा कारण ये है कि अजीत पवार पर कई तरह के भ्रष्टाचार के आरोप है. विपक्ष आरोप लगा रहा है कि इसी भ्रष्टाचार की वजह से डरकर अजीत पवार ने बीजेपी को समर्थन देने के लिए तैयार हो गये.

पांचवा कारण, साल 2008 में जब एनसीपी और कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनायी तब छगन भुजवल को उपमुख्यमंत्री बना दिया गया था इस बात से भी उस समय अजीत पवार नाराज थे. हालाँकि तब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे आशोक चव्हाण को इस्तीफ़ा देना पड़ा था ऐसे में अजीत पवार को लगा था कि अब मुख्यमंत्री कोई एनसीपी से ही बनेगा और अजीत पवार इसके लिए खुद को सबसे आगे पाते थे लेकिन सीटें कम होने के बावजूद भी पृथ्वीराज चव्हाण मुख्यमंत्री बना दिए गये थे. इन बातों से कहीं ना कहीं शरद पवार और अजीत पावर के बीच मतभेद थे.


 वहीँ अगर शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी मिलाकर सरकार बनाते तो मंत्रलाय का तीन हिस्सों में बंटवारा होता वहीँ बीजेपी के साथ सरकार बनाने पर अजीत पवार के पास मंत्रलाय के बंटवारे में सीधा आधा हिस्सा मिलने वाला है. ऐसे में बीजेपी के साथ सरकार बनाने पर अजीत पवार को फायदा था. हालाँकि अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है. रविवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई और मामला अब सोमवार तक टाल दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर सोमवार को सारे कागजात कोर्ट के समक्ष रखने का आदेश दिया है. अब जब सोमवार को कोर्ट में सुनवाई होगी तब मामला साफ होगा कि सरकार पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला लिया है.