जीरो विधायक वाली शिवसेना गोवा में चमत्कार करने के देख रही सपने

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शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के सहयोग से महाराष्ट्र में सरकार का गठन कर लिया तो उसके हौसले आसमान की बुलंदियों पर उड़ान भरने लगे. और इसी उत्साह में उसने ऐसी बात कर दी जिसे अतिआत्मविश्वास या फिर मुंगेरी लाल के हसींन सपने के अलावा कुछ और नहीं कहा जा सकता. शिवसेना अब गोवा की भाजपा सरकार गिराने के सपने देखने लगी है.

ये हम यूँ ही नहीं कह रहे बल्कि शिवसेना नेता संजय राउत खुद कह रहे हैं. पहले आप संजय राउत का बयान सुन लीजिये. संजय राउत ने कहा, “गोवा में भी राजनीतिक भूकंप आने वाला है. विजय सरदेसाई और दूसरे तीन विधायक शिवसेना के साथ गठबंधन बना रहे हैं. जैसा महाराष्ट्र में हुआ है, गोवा में नया राजनीतिक गठबंधन आकार ले रहा है. गोवा में भी जल्द ही आपको एक चमत्कार दिखेगा.” इसके अलावा उन्होंने ये भी कहा कि हम पुरे देश में भाजपा विरोधी फ्रंट बनाना चाहते है, शुरुआत महाराष्ट्र से हो चुकी है.

संजय राउत के सपनों को मुंगेरी लाल के हसीन सपने नहीं कहेंगे तो और क्या कहेंगे. 40 सदस्यों वाली गोवा विधानसभा में शिवसेना के एक भी विधायक नहीं है लेकिन वो पूर्ण बहुमत वाली सरकार को गिराने के सपने देख रही है. कांफिडेंस लेवल इनफिनिटी. काश मुझे भी इतना कांफिडेंस आ पाता तो मैंने भी अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के सपने देखने लगता.

2014 के बाद से कई चेहरों ने ऐसा ही सपना देखा था. कई चेहरों ने भाजपा विरोधी फ्रंट बनाने की कोशिश की. कई चेहरे खुद को पीएम का उम्मीदवार भी समझने लगे थे लेकिन जब सपना टूटता है तो कितना दर्द होता है शिवसेना को उन नेताओं से पूछना चाहिए.

पश्चिम बंगाल में चुनाव जीतने के बाद ममता बनर्जी ने भी भाजपा विरोधी फ्रंट बनाने की कोशिश की थी लेकिन इस चक्कर ने उनके हाथ से राज्य के आधे लोकसभा सीट निकल गए. आंध्र प्रदेश में मुख्यमंत्री रहते चन्द्र बाबू नायडू ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकता कायम करने की खूब कोशिश की, खूब हाथ पाँव मारे लेकिन लोकसभा चुनाव में उनके सपने टुकड़े बन कर बिखर गए. साथ ही राज्य की सत्ता भी निकल गई.

तेलंगाना में लगातार दूसरी बार चुनाव जीतने वाले KCR ने भी भाजपा विरोधी फ्रंट बनाने की कोशिश की और खुद को उप प्रधानमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट किया लेकिन लोकसभा चुनाव में भाजपा ने तेलंगाना में भी दस्तक दे दिया. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल तो पीएम बनने के लिए इतने बेताब थे कि मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ कर 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ने सीधे बनारस जा पहुंचे नरेद्र मोदी को चुनौती देने लेकिन जब पाँव के नीचे से जमीन खिसक गई तो तौबा कर लिया. अखिलेश यादव, मायावती जैसे नाम भी हैं इस लिस्ट में. लेकिन सबके सपने अधूरे रह गए.

अब इस लिस्ट में शिवसेना और उद्धव ठाकरे का नाम भी जुड़ गया है. कम से कम संजय राउत के बयान तो यही इशारा करते हैं. खैर सपने देखने का हक सबका है. देखते हैं शिवसेना के सपने कब पूरे होते हैं.