मध्यप्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गयी है. सिंधिया के कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद उनके समर्थक 22 विधायकों ने भी इस्तीफा दे दिया है. जिसके बाद से ही एमपी में कमलनाथ सरकार पर संकट के बादल छा गये हैं. कांग्रेस के लाख प्रयासों के बाद ही विधायक नहीं रुके और इस्तीफा दे दिया. जिससे पार्टी की मुश्किलें बढ़ गयी हैं. कांग्रेस को एक बाद एक झटका लगता जा रहा है. दिल्ली में एक भी सीट हासिल नही कर सकी कांग्रेस का मध्यप्रदेश में ये हाल होगा ऐसा उन्होंने सोचा भी नही होगा.

जानकारी के लिए बता दें कर्नाटक में गठबंधन की सरकार जाने के बाद अब एमपी में भी सरकार जाना तय माना जा रहा है क्योंकि कांग्रेस के पास अब विधायकों की संख्या 92 रह गयी है और बीजेपी के पास ये आंकड़ा 107 है. वहीं बहुमत साबित करने के लिए इस समय 104 विधायकों की जरुरत है. वहीं सिंधिया ने इस्तीफा देने के बाद बीजेपी की सदस्यता कई वरिष्ठ नेताओं के बीच ले ली है. सूत्रों के अनुसार खबर ये भी आ रही है कि सिंधिया को मोदी कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है.

सिंधिया के इस्तीफे के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ जहाँ एक तरफ दावा कर रहे हैं कि वह बहुमत साबित कर लेंगे तो वही दूसरी तरफ कांग्रेस ने हार मान ली है. सिंधिया के इस्तीफे के बाद लोकसभा विपक्ष नेता और कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस पार्टी ने इतना दिया उससे बेईमानी कर रहे हैं. उन्होंने कहा है कि इस फ़ैसले से पार्टी का नुकसान हुआ है और लगता है अब मध्यप्रदेश में हमारी सरकार नहीं बच पाएगी.

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में पिछले काफी समय से ऐसी स्थिति बन रही थी कि यहाँ पाला कभी भी बदल सकता है. सिंधिया काफी समय पहले संकेत दे चुके थे कि वह कांग्रेस को अलविदा कह सकते हैं. सिंधिया और कमलनाथ के बीच चल रही आंतरिक कलह भी सुलझ नहीं पा रही थी. अब नतीजा ये निकला कि सिंधिया ने अपनी दम पर पूरा पांसा ही पलट दिया.