पत्रकार आतिश तासीर ने पीएम मोदी की तुलना महमूद गजनी और औरंगजेब से की

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आतिश तासीर याद है आपको? वही आतिश तासीर जिन्होंने लोकसभा चुनाव के वक़्त पीएम मोदी के बारे में टाइम मैगजीन में एक आर्टिकल लिखा था और उन्हें डिवाइडर इन चीफ बताया था, यानी कि समाज को बांटने वाला मुखिया. उस आर्टिकल पर खूब विवाद हुआ था . आतिश तासीर एक बार फिर विवादों में हैं लेकिन इस बार अपने एक ट्वीट की वजह से . आतिश ने एक ट्वीट किया और उसमे मोदी की तुलना महमूद गजनी और औरंगजेब से की. महमूद गजनी और औरंगजेब की गिनती इतिहास के उन शासकों में होती है जिन्होंने हिन्दू धर्म के मंदिरों को तोड़ा और लूटा .

आतिश ट्वीट किया – “औरंगजेब को भूल जाइए, काशी विश्वनाथ मंदिर के एक महंत ने बताया कि महमूद गजनी के बाद जितनी मंदिरें मोदी ने तोड़ी है उतनी मंदिरें किसी ने नहीं तोड़ी” आतिश के मुताबिक़  उस महंत का इशारा बनारस में काशी विश्वनाथ कॉरीडोर के निर्माण के लिए हटाये जा रहे अतिक्रमण से था, जिसके लिए मंदिरों को तोडा जा रहा है.

आतिश ने कई तस्वीरें भी शेयर की जिसमे मलबों के बीच कई मंदिर जीर्ण शीर्ण अवस्था में दिख रहे हैं . आतिश ने जो तस्वीरें पोस्ट की वो मलबों के बीच में खड़े मंदिरों की हैं, ना कि मंदिर के मलबों की तस्वीरें है . अब हम बताते हैं कि सच्चाई क्या है . काशी विश्वनाथ कॉरीडोर के निर्माण के लिए अतिक्रमण हटाया जा रहा है और उस दौरान अवैध मकानों को ध्वस्त किये जाने के क्रम में कई पुराने मंदिर निकल कर बाहर आये. मतलब की लोगों ने कई पुराने मंदिरों पर अतिक्रमण कर के अपने घर बना लिए और वो मंदिर घरों के अन्दर छुप गए. इनमे से कई मंदिर तो 18वीं और 19वीं शताब्दी के हैं . नवभारत टाइम्स में इस सम्बन्ध में एक खबर भी छापी गई थी कि किस तरह से घरों को ध्वस्त करने के बाद उनके अन्दर से पुराने मंदिर निकल रहे हैं.

कॉरीडोर के रास्ते से हटाये जा रहे अतिक्रमण में अब तक 50 से अधिक पुराने मंदिर सामने आ चुके हैं. इनमे से एक मंदिर तो ऐसा था जो हुबहू काशी विश्वनाथ मंदिर की तरह था. यह मंदिर  मकान नंबर सीके 34/27 के ध्वस्तीकरण के दौरान सामने आया. इस मंदिर में जो शिवलिंग और नंदी की मूर्ती मिली है उसका आकार काशी विश्वनाथ मंदिर से भी बड़ा है. जाहिर सी बात है कि जब अतिक्रमण हटाया जाएगा तो उसके बाद निकलने वाले मंदिर के आस पास मलबों का ढेर लगेगा लेकिन दुष्प्रचार की भावना से आतिश तासीर ने ये खबर फैलाई कि पीएम मोदी मंदिरों को तुड़वा रहे हैं.

भारत पर आक्रमण करने वाले मुस्लिम और मुगलों को अच्छा साबित करने के लिए अक्सर लिबरल गैंग द्वारा झूठ फैलाया जाता है कि मुस्लिम आक्रमणकारियों ने भारत को लूटा नहीं बल्कि अमीर बनाया.आतिश तासीर का झूठ उसी झूठ की एक कड़ी है. औरंगजेब ने 1669 में औरंगजेब ने आक्रमण कर इस मंदिर को क्षति पहुंचाई थी और उसकी दीवार से लगते हुए एक मस्जिद का निर्माण कराया था जो आज ज्ञानवापी मस्जिद के नाम से जाना जाता है. लेकिन लिबरल गैंग को अपना एजेंडा चलाना है इसलिए तथ्यों को झूठ का आवरण ओढा कर बहुत ही बेशर्मी से पेश किया जाता है.

पीएम मोदी की महत्वकांक्षी काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर परियोजना को विकसित करने के लिए 296 इमारतों की पहचान की गयी,जिनका अधिग्रहण करके उन्हें ध्वस्त किया जा रहा है. भारतीय पुरातत्तव सर्वेक्षण के नीरज सिन्हा का कहना है अतिक्रमण हटाने के दौरान जो प्राचीन मंदिर निकल कर सामने आ रहे हैं उन मंदिरों की प्राचीनता का पता लगने के बाद कॉरिडोर निर्माण के समय इनका जीर्णोद्धार कराकर मंदिरों के बाहर शिलापट्ट पर इतिहास लिखा जाएगा . वैसे सारी उम्र मुस्लिमों को पीड़ित और हिन्दुओं को उत्पीड़क दिखा कर असहिष्णुता का ढोल पीटने वाले आतिश तासीर जैसे लोगों को अचानक से मंदिरों और हिन्दुओं की इतनी फ़िक्र होने लगे तो मन में शंका उठनी लाजिमी है. लेकिन मंदिरों की फोटो के साथ खबर को गलत तरीके से पेश कर आतिश ने अपने एजेंडे को उजागर कर दिया कि उनका मकसद बस देश के हिन्दुओं के मन में पीएम मोदी के प्रति दुर्भावना भरना है.