कश्मीर में आज तक की रिपोर्टर मौसमी सिंह ने जम कर मचाया उत्पात

3052

आज तक की रिपोर्टर मौसमी सिंह को आप अच्छी तरह से जानते होंगे. अगर नहीं जानते तो हम आपको याद दिला देते हैं कि ये वही मौसमी सिंह हैं, जो लोकसभा चुनाव से पहले जब प्रियंका गाँधी को कांग्रेस महासचिव नियुक्त किया गया था तब कांग्रेस दफ्तर के बाहर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं से नारे लगवा रही थीं “दहन करो मोदी की लंका, बहन प्रियंका-बहन प्रियंका” ये नारा खुद मौसमी कार्यकर्ताओं को सिखा रही थी और कह रही थी जरा जोर से नारे लगाइए.

मौसमी सिंह का जिक्र हम आज इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने शनिवार को श्रीनगर एअरपोर्ट पर जमकर ड्रामा किया और उत्पात मचाया. राहुल गाँधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं का प्रतिनिधिमंडल कश्मीर का दौरा करने श्रीनगर एयरपोर्ट पहुंचा. हालाँकि उन्हें एयरपोर्ट से ही वापस भेज दिया गया लेकिन आज तक की रिपोर्टर मौसमी सिंह ने नेताओं को कवर करने के लिए सारे नियम क़ानून की धज्जियाँ उड़ा दी और सुरक्षाकर्मियों पर आरोप लगाये की उन्होंने (सुरक्षाकर्मियों) उनके साथ मारपीट की है .

दरसल सुरक्षा की दृष्टि से एयरपोर्ट पर विडियोग्राफी और फोटोग्राफी प्रतिबंधित है ऐसा इसलिए है क्योंकि श्रीनगर एअरपोर्ट का इस्तेमाल सेना भी करती है और इसलिए यहाँ सुरक्षा के नियम सख्त है …. फिर भी सारे नियमों को तोड़ कर मौसमी सिंह अपने कैमरामैन के साथ एयरपोर्ट के भीतर नेताओं के विडियो फिल्माने की कोशिश करने लगीं. जब सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोका तो मौसमी बदतमीजी पर उतर आई और उलटे सुरक्षाकर्मियों पर ही मारपीट के आरोप लगा दिए . उसके बाद मौसमी चिल्ला चिल्ला कर कैमरे पर कश्मीर के बुरे हालात के बारे में बताने लगी. उसकी इस क्लिप को पाकिस्तान के न्यूज चैनलों ने इस्तेमाल किया और एक बार फिर से ये साबित करने की कोशिश की कि कश्मीर में भारत ज्यादती कर रहा है. और मीडियाकर्मियों को रिपोर्टिंग करने से रोक रहा है .

यही नहीं विपक्षी नेताओं को श्रीनगर ले जा रहे फ्लाईट में भी मौसमी सिंह ने शरद यादव से सवाल पूछा कि कश्मीर के जो हालात हैं उससे आपको इमरजेंसी के दिन याद आते हैं कि नहीं याद आते हैं? जबकि शरद यादव कह रहे हैं कि वो खुद इमरजेंसी के दौरान साढ़े चार साल जेल में बंद रहे .लेकिन फिर भी मौसमी जबरदस्ती उनके मुंह में शब्द डाल कर कश्मीर के हालात की तुलना इमरजेंसी से कर रही है.

ये पहली बार नहीं है जब मौसमी सिंह ने अपनी रिपोर्टिंग के दौरान किसी ख़ास पार्टी या यूँ कहें कांग्रेस पार्टी का एजेंडा चलाने की कोशिश की है. इससे पहले एक बार मणिशंकर अय्यर ने रिपब्लिक टीवी के पत्रकार के साथ बदसलूकी की और माइक को फेंक दिया तो मौसमी सिंह खुलकर मणिशंकर अय्यर के बचाव में उतर आईं और दुसरे पत्रकारों को मणिशंकर अय्यर से सवाल करने से रोक दिया और दुसरे पत्रकारों को जर्नलिज्म पर नसीहत देने लगी.

दरअसल मौसमी सिंह मीडिया जगत में कोई बड़ा नाम नहीं है लेकिन लगता है कि बड़ा नाम बनने की और जल्दी शोहरत पाने की बहुत बैचेनी है उनके अन्दर. वैसे भी मौसमी वही सब तो कर रही है जो उनके मीडिया ग्रुप की एक बड़ी एंकर करती हैं. चाहे ICU में कैमरा और माइक ले कर घुस जाना और डॉक्टर के साथ बदसलूकी करना या फिर बिना किसी सबूतों वाले बेटी के आरोपों पर विधायक पिता का मीडिया ट्रायल कर देना और फिर अपनी हरकतों पर शर्मिंदा होने की बजाये विक्टिम कार्ड खेल देना की हम अपना कर्तव्य निभा रहे थे. क्या मौसमी सिंह और उनका चैनल बताएगा कि जिस एयरपोर्ट का इस्तेमाल सेना करती है और जहाँ फोटोग्राफी और विडियोग्राफी प्रतिबंधित है, वहां सुरक्षाकर्मियों के मना करने के बावजूद विडियो रिकार्डिंग क्यों की जा रही थी? ये कौन सी पत्रकारिता है ?