जानवरों से लेकर Bollywood के गानों तक सब आचार संहिता की निगरानी में

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चुनाव को लेकर हर तरफ चहल पहल मची हुई है… वहीं दूसरी ओर अचार संहिता ने अपनी कमर कासी हुई है ….. पिछले लोक सभा इलेक्शन के बाद चुनाव आयोग पर बहुत से आरोप लगे थे और evm पर भी … जिसकी वजह से is बार आयोग की तैयारी पूरी है … मतदान केंद्र से लेकर सड़कों तक पैनी नज़र है प्रशासन की … वो कहते है दूध का जला छाछ भी फूक फूक कर पीता है…वैसे ही आरोपों को झेलने के बाद चुनाव आयोग सचेत हो गया  है…

वैसे आप भी सोच रहे होंगे कि चौथे चरण के मतदान के बाद भी चुनाव आयोग  के कार्यों की चर्चा क्यों कर  रहे हम … दरअसल बात कुछ ऐसी है कि आचार संहिता लगने के बाद किसी भी पार्टी विशेष का प्रचार प्रसार नहीं हो सकता…अगर ऐसा होता है तो इसके लिए दंड भी मिलता … चाहे यह दंड किसी पार्टी को  हो या फिर किसी व्यक्ति विशेष को ….

वैसे  ही महाराष्ट्र से एक मामला सामने आया है कि वहां आचार संहिता का उलंघन कर रहे एक कुत्ते को गिरफ्तार कर लिया गया है … अगर आपको हंसी आ रही तो आप हंस लीजिये… लेकिन यह सच है… तो बात दरअसल यह है कि महाराष्ट्र के नंदुर बाघ में एक 65  वर्षीय बुजुर्ग अपने कुत्ते को टहला रहे थें … उस कुत्ते पर बीजेपी के सिंबल वाला स्टीकर सटा हुआ था और यह लिख था “मोदी को लाओ देश बचाओ”…. इसके खिलाफ किसी स्थानीय ने शिकायत दायर की … और उस कुत्ते को मालिक समेत गिरफ्तार कर लिया गया….और उनपर आचार संहिता और चुनाव के नियम को तोड़ने का इलज़ाम लगा है ….

वहीँ दूसरी ओर एक और मामला सामने आया है कि रेडियो में उन गानों को बैन कर दिया गया है जीमने हाथ या फूल जैसे शब्द आते है … असल में बात कुछ ऐसी है कि शिवपुरी में एक शक्श ने रेडियो पर आ रहे एक गाने की शिकायत की… वह गाना था फूल तुम्हें भेजा है ख़त में… उनका कहना है की फूल शब्द बीजेपी को symbolize करता है… इसके बाद रेडियो ने उन गानों को चलाने से मन कर दिया जिसमे हाथ,फूल और हाथी जैसे शब्द हो… क्योंकि हाथ कांग्रेस को symbolize करता, फूल बीजेपी को तो वहीँ हाथी बसपा को …

वैसे भी  रेडियो द्वारा भी किसी ख़ास पार्टी का प्रचार नहीं होना चाहिए …. आपको बता दें ज्यादातर ये गाने लोगों के रिक्वेस्ट पर चलाए जाते थे …. लेकिन अब रेडियो चैनल इन गानों को चलाने  से मना कर दे रहा है/…

लोकतंत्र की यही खूबसूरती है कि  हमे अपने बात को कहने , रखने और अपना नेता चुनने की आज़ादी है … अगर कुछ दिनों तक हम publically किसी खास पार्टी का समर्थन ना करे तो इससे हमारा झुकाव किसी पार्टी विशेष के प्रति कम नहीं हो जाएगा…. नियम कानून किसी न किसी ख़ास वजह से बनाए जाते है … और इसका पालन करना हमारा कर्तव्य बनता  है…