औरंगाबाद में हुई घटना का चश्मदीद गवाह आया सामने और बताया उस समय कैसे गयी सभी की जा-न

देश इस समय कोरोना जैसी महामारी में जूझ रहा है. केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की तमाम कोशिशों के बावजूद भी देश में मरीजों की हालत सुधर नहीं रही है. हर दिन हजारों की संख्या में लोग इस बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं और सैंकड़ों अपनी जान दे रहे हैं. कोरोना के कहर के चलते केंद्र सरकार ने पूरे देश में लॉकडाउन कर दिया था जिससे जो व्यक्ति जहाँ था वही रह गया क्योंकि सरकार के पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं था.

जानकारी के लिए बता दें देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 मई तक के लिए लॉकडाउन को लगातार तीसरी बार बढ़ाया है. लॉकडाउन के चलते पूरे देश में आवाजाही बंद हो गयी. जिसके चलते अन्य राज्यों में फंसे में प्रवासी मजदूरों को भारी समस्या हो गयी. हालाँकि सरकार ने इस मजदूरों को लेकर हर संभव मदद देने का ऐलान किया और काम किया. धीरे धीरे सरकार स्पेशल ट्रेन चलाकर मजदूरों को उनके राज्य पहुंचा रही थी इसके बावजूद भी लोग पैदल जा रहे हैं या साइकिल से जा रहे हैं.

इसी दौरान औरंगाबाद में भी 16 मजदूर पटरी के किनारे चलते अपने घर की ओर निकल पड़े. बीच रास्ते में जब वह थक गये तो उन्होंने पटरी पर ही आराम करना शुरू कर दिया जिसके बाद ट्रैक पर अचानक से मालगाड़ी आ गयी जिसके बाद ट्रेन की चपेट में आने से उन लोगों की जान चली गयी. ये सभी मजदूर रेल के रास्ते मध्यप्रदेश अपने घर जा रहे थे. अब इस घटना का एक चश्मदीद गवाह सामने आया है जिसने ये पूरा मंजर अपनी आँखों से देखा. इस घटना में बाल बचे लोगों ने अपने समूह के सदस्यों को जगाने की कोशिश की लेकिन वो जगे नहीं.

गौरतलब है कि उन्ही में से एक मजदूर पाटिल ने कहा कि ‘फंसे हुए 20 मजदूरों का समूह जालना से पैदल चल पड़ा। उसने आराम करने का फैसला किया और इनमें से ज्यादातर पटरी पर ही लेट गए। तीन मजदूर लेटने के लिए कुछ दूरी पर समतल जमीन पर चले गए. कुछ देर बाद इन तीनों ने एक मालगाड़ी को आते देखा और चिल्लाए लेकिन किसी को कुछ सुनाई नहीं दिया.’ इस तरह इन साथी मजदूरों का चिल्लाना व्यर्थ रहा और ट्रेन उनके ऊपर से ही निकल गयी.