उधर महाराष्ट्र में सरकार गिरी, इधर मोदी सरकार ने दिल्ली वालों के लिए किया बड़ा काम

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इधर महराष्ट्र में देवेन्द्र फडणवीस की सरकार गिरी कि उधर संसद के लोकसभा सदन में एक महत्वपूर्ण बिल पास हो गया.. हालाँकि महाराष्ट्र की राजनीति के चक्कर में ये खबर कहीं दबी कुचली से अलग-थलग रह गयी..
महाराष्ट्र में देवेन्द्र फडणवीस ने ये कहते हुए इस्तीफा दे दिया है कि अजीत पवार के इस्तीफ़ा देने के बाद हमारे पास बहुमत नही है, इसके बाद देवेन्द्र ने अपना इस्तीफ़ा राज्यपाल को सौंप दिया लेकिन जिस वक्त महाराष्ट्र में ये राजनीतिक ड्रामा चल रहा था उसी वक्त दिल्ली के संसद के लोकसभा में एक महत्वपूर्ण बिल पास हो रहा है.

दरअसल दिल्ली के लोगों की सालों पुरानी मांग थी कि अवैध कालोनियों को पास किया जाए मतलब उन्हें वैध माना जाए.. इसके लिए मोदी सरकार ने कुछ दिन पहले घोषणा भी की लेकिन इसे एक विधेयक के रूप में सदन में पास कराना जरूरी था. केंद्रीय मंत्री हरदेव सिंह पुरी ने यह यह बिल सदन में पेश किया. इस विधेयक के पास होने के बाद दिल्ली में लगभग 40 लाख निवासियों को लाभ मिलने की संभावना है.

इस विधेयक से कॉलोनियों के निवासियों को संपत्ति के स्वामित्व या हस्तांतरण या बंधक या पक्ष में अधिकार को मान्यता देने या राष्ट्रीय राजधानी के लिए विशेष प्रावधान प्रदान करेगा, जो पॉवर ऑफ अटॉर्नी, समझौते से बिक्री, इच्छाशक्ति, कब्जा पत्र, आदि के आधार पर संपत्ति रखे हुए है. सरल भाषा में कहें कि उन्हें उसका मालिकाना  इस बिल के पेश होने से दिल्ली निवासियों के घरों को वैध होने का रास्ता साफ हो गया है. इस कदम ने दिल्ली वासियों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है.

 दरअसल दिल्ली में लगभग 1800 कालोनियां ऐसी हैं..जो अवैध थी जिसमें लाखों लोग रहते है. ये दिल्ली के चुनावों में बड़ा मुद्दा भी होता था लेकिन आज तक इन अवैध कालोनियों को नियमित करने के नाम पर सिर्फ वोट लिए जाते थे और फिर अगले चुनाव में वहीँ हाल होता था, लेकिन मोदी सरकार के कार्यकाल में इस मुद्दे को सुना गया और इस पर अमल किया गया. और मंगलवार को जब महाराष्ट्र में सियासी ड्रामा चल रहा था उसी वक्त लोकसभा में इस बिल को पास कर दिया गया है.


 कुछ ही दिन पहले केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला लिया गया . इसी के बारे में दिल्ली के उपराज्यपाल ने जानकारी देते हुए कहा था कि दिल्ली रिफॉर्म्स ऐक्ट के सेक्शन 81 के तहत दर्ज केसों को भी वापस लिया जाएगा. उपराज्यपाल ने राजधानी के 79 गावों के शहरीकरण को भी मंजूरी दे दी है. उपराज्यपाल ने ट्वीट कर बताया था कि इससे अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लोग अपने घर के मालिकाना हक के दस्तावेज बनवा सकेंगे. इससे उन्हें नागरिक सुविधाएं हासिल करने और लोन आदि लेने में भी सुविधा होगी.


हालाँकि इस मुद्दे पर राजनीति भी जमकर होने वाली है क्योंकि जैसे ही केंद्र सरकार ने अवैध कालोनियों को नियमित करने का फैसला लिया उसके तुरंत बाद अरविन्द केजरीवाल ने कहा था कि ये केजरीवाल सरकार की मेहनत का नतीजा है लेकिन केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पूरी ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली सरकार ने इन कॉलोनियों को चिन्हित कर इनपर काम करने के लिए साल 2021 तक का समय मांगा था. केंद्र ने उनके लचर रवैये को देखते हुए खुद ही इन कॉलोनियों को नियमित करने को लेकर निर्णय लिया.


 अब जल्द ही राजधानी दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने वाले है और कालोनियों को नियमित करने का मुद्दा जोर शोर से उठने वाला है.. इस पर राजनीति भी जमकर हो सकती है..
खैर कुछ भी हो, फायदा तो आम लोगों को हुआ..
बिना केंद्र सरकार की अनुमति से इसे पास ही नही किया जा सकता था चाहे अब इस काम का क्रेडिट लेने की होड़ में सब खड़े रहे..
दिल्ली वालों की ये मांग पूरी हो जाने के बाद अब ये मुद्दा चुनावी वादों में से हट जाएगा.. एक तरफ जहाँ महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर बवाल चल रहा है वहीँ दूसरी तरफ दिल्ली वालों के चेहरे मुस्कुरा रहे हैं..