भारतीय रेल को ऐसे चूना लगाता था बुजुर्ग, रेलवे ने खोली पोल

3697

भारतीय रेलवे के खाने में कीड़े या छिपकली और घटिया खाने की शिकायत तो आपने खूब सुनी होगी या आपने भी शिकायत की होगी. इस तरह की शिकायत को लेकर भारतीय रेल सक्रीय हुई और अपने पेंट्री वालों पर जुर्माना लगाना शुरू कर दिया. अब तक करोडो रूपये के जुर्माने लगाये जा चुके हैं लेकिन एक बुजुर्ग ने खाने में छिपकली को लेकर शिकायत की और जब इस घटना की भारतीय रेल ने जांच की तो कहानी ही कुछ और सामने आई.

भारतीय रेलवे के अधिकारियों ने बार-बार आ रही एक बड़ी शिकायत के पीछे का झूठ भी सबके सामने ला दिया है। शिकायत मिल रही थी कि रेलवे के खाने में छिपकली निकली है, एक बार, दो बार लेकिन बार-बार…? 70 वर्षीय शख्स अपने इस जाल में रेलवे को नहीं फंसा पाया। जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक़ सच तो यह था कि शिकायतकर्ता वरिष्ठ नागरिक सुरेन्द्र पाल सिंह ने मुफ्त में खाना पाने के लिए अपने खाने को दूषित कर दिया था. ठीक इसी तरह की दो घटनाओं में समानता मिलने के बाद रेलवे के अधिकारीयों ने सबको सतर्क कर दिया. मतलब कि यह शख्स रेलवे को चूना लगाता था, बार-बार फ्री खाने के चक्कर में अपने खाने में छिपकली मिला लेता था इसके बाद DCM ने मामलों में समानता पाते हुए संबंधित स्टाफ को इस शख्स के बारे में सतर्क कर दिया।

वरिष्ठ अधिकारी बसंत कुमार शर्मा के अनुसार, ‘एक ही व्यक्ति ने 14 जुलाई को पहले जबलपुर स्टेशन पर अपने समोसे में छिपकली मिलने का दावा किया और फिर उसी ने गुंटकल स्टेशन पर अपनी बिरयानी में भी छिपकली मिलने की शिकायत की। मुझे संदेह हुआ और मैंने उस व्यक्ति की तस्वीर साझा करते हुए वरिष्ठ डीसीएम को सतर्क किया। वह 70 साल के रहे होंगे और मुफ्त में भोजन पाने के लिये ऐसा किया करते होंगे।’

जानकारी तो ये भी है कि ये बुजुर्ग काफी समय से रेलवे को चूना लगा रहा था लेकिन जब पूछताछ की गयी तो उसने सबकुछ अधिकारियों को बता दिया. इस चाल के लिए उसने ‘मानसिक रोग दूर करने वाली मछली’ का इस्तेमाल किया। बुजुर्ग ने कहा कि मैंने कुछ गलत नहीं किया, मैं बूढ़ा आदमी हूं, मानसिक रूप से अस्थिर हूं। वहीं, आगे उस व्यक्ति ने कहा, ‘मुझे ब्लड कैंसर है, कृपया मुझे जाने दो. पंजाब में एक आयुर्वेदिक दवा है, मैंने हड्डी रोगों और मानसिक बीमारियों को दूर करने की एक मछली का इस्तेमाल किया।’

अब अधिकारियों का कहना है कि ये व्यक्ति मानशिक रूप से ठीक है या नही इस बारे में अभी कोई ठोस जानकारी नही है. बता दें कि अक्टूबर तक, रेलवे को ट्रेनों में परोसे जाने वाले भोजन की खराब गुणवत्ता के कारण यात्रियों से 7,500 से अधिक शिकायतें मिली थीं और विक्रेताओं पर लगभग 1.5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया जा चुका था।

 अब ये हमारे देश के नागरिकों को समझना चाहिए जो ट्रेन में सफर करते हैं कि जब ट्रेन के टॉयलेट से डब्बा उठा ले जाते हैं.. स्विच निकाल लेते हैं.. सीसे तोड़ देते हैं… पान की पीक यहाँ वहां मार देते हैं… खुद ही ट्रेन में गंदगी फैलाते हैं और फिर कहेंगे रेलवे में ये कमी है रेलवे में वो कमी है. आखिर ट्रेन के टॉयलेट के डब्बों को जंजीर से बाँधने की जरूरत क्यों आन पड़ी.. इस सवाल के जवाब में आप सारा माजरा खुद ही समझ जायेंगे,रेलवे लगातार अपनी कमियों में सुधार करने की कोशिश कर रहा है, इसमें उसे सफलता भी मिल रही हैं लेकिन ये हमारे और आपके सहयोग के बिना संभव नही है.

भारतीय रेल में अच्छी सुविधाएं, साफ़ सुथरा खाना और सफाई पर विशेष ध्यान दे रही है. कई रेलवे स्टेशन को एयरपोर्ट के जैसा बनाया जा चूका है. स्टेशन का सुन्दरीकरण हो रहा है लेकिन जब हम और आप ही इस लूटने और बदनाम करने पर तुले हुए हैं तो किया ही क्या जा सकता है. रेलवे आपकी सम्पत्ति है इसका आपको खयाल रखना चाहिए ये बात तो आपने कई बार सुनी है लेकिन लोग इस अपनी नही, अपनी ही सम्पत्ति मान लेते हैं और अपने साथ घर लेकर चले जाते हैं. ऐसे तो नही आएगा सुधार!