आरे जंगल के लिए चिल्लाने वाली शिवसेना सरकार में आते ही करने लगी मनमानी!

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मेट्रो के लिए आरे जगंल काटे जाने पर जमकर बवाल मचा था. बवाल नही, बवंडर आया था. चिपको आन्दोलन शुरू हो गया था. होना भी चाहिए, पेड़ कहीं भी कटे उसका विरोध होना चाहिए. हालाँकि हालात को भी समझना चाहिए. जब मुंबई में पेड़ काटे जाने को लेकर बावल मचा था तो इसका विरोध करने वालों को पूरा सर्मथन शिवसेना ने दिया था कि पर्यावरण के लिए ऐसा नही होना चाहिए.

अब शिवसेना सरकार में आ गयी है. खुद उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गये है, लेकिन अब जो खबर निकल कर सामने आ रही है वो ये है कि शिवसेना बाला साहेब स्मारक बनाने के लिए 5000 पेड़ों की कटाई करने जा रही है. पर्यावरण प्रेमी बड़ी बारीकी से नजरें गड़ाए बैठे है. दूसरी ओर, बीजेपी भी ताक लगाए बैठी है और सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रही है.

दरअसल औरंगाबाद के प्रियदर्शनी उद्यान में बालासाहेब ठाकरे का स्मारक बनाने का प्रस्ताव पहले ही मंजूर किया गया था, लेकिन दिक्कत यह है कि जहां पर स्मारक बनाया जाएगा वहां पर पेड़ है. पहले उसे काटना पड़ेगा तब जाकर स्मारक बनाया जा सकेगा. अब शिवसेना ने जब मुंबई में मेट्रो ( जो मुंबई वालों की सुविधा के लिए बनाया जा था) के लिए पेड़ काटने का विरोध कर रही थी तो क्या अब वही शिवसेना बाला साहेब के लिए हजारों की संख्या में पेड़ों को कटवाएगी. वहीँ मीडिया में खबर सामने आने के बाद खुद औरंगाबाद के मेयर ने पेड़ ना काटे जाने की बात कही है.

हालाँकि अब देखने वाली बात ये है कि क्या औरंगाबाद में (जहाँ शिवसेना और बीजेपी महानगरपालिका में है) शिवसेना पेड़ काटकर बाला साहेब का स्मारक बनवाएगी या नही! हालाँकि अभी तक इस खबर की पुष्टि नही हुई है लेकिन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ इस पर फैसला सरकार लेने वाली है.