अखिलेश सरकार ने 40 हि’न्दुओं को बनाया था मुज़फ्फर’नगर दं’गों का आरो’पी, सभी बरी

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साल 2013 में उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर में हुए दं’गों के मामले में 41 आरोपियों में से 40 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया . इन दं’गों में करीब 62 लोग मा’रे गए जिनमे से 40 अल्पसंख्यक समुदाय और 20 बहुसंख्यक थे और करीब 60 हज़ार लोग बेघर हो गए थे . तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर ह’त्या के 10 मामलों में 41 लोगों पर केस दर्ज हुआ, जिनमे से 40 आ’रोपी बहुसंख्यक थे और 1 आरोपी अल्पसंख्यक समुदाय का था . अदालत ने सभी 40 हिन्दू आरो’पियों को बरी कर दिया और 1 अल्पसंख्यक आ’रोपी को दोषी पाया गया .

27 अगस्त 2013 को कवाल गाँव में एक जाट समुदाय की लड़की के साथ दो अल्पसंख्यक युवकों ने छेड़’छाड़ की . उसके बाद लड़की के दो भाइयों गौरव और सचिन ने उन दोनों युवकों को पी’ट पी’ट कर मा’र डाला जिन्होंने उनकी बहन के साथ छेड़’छाड़ की थी . उसके बाद जवाब में अल्कीपसंख्यकों भीड़ ने सचिन और गौरव की जा’न ले ली .इस ह’त्या के बाद जाट और मुस्लिम समुदायों ने अपने अपने समुदाय की महापंचायत बुलाई . महापंचायत के बाद दं’गे फैलने शुरू हो गए .

photo source – the indian express

7 सितंबर 2013, महापंचायत कर के लौट रहे किसानों के काफिले पर हम’ला किया गया और उन्हें मा’र कर नहर में फेंक दिया गया . बाद में गोताखोरों ने नहर में से 6 श’व बाहर निकालें . मुजफ्फरपुर में शुरू हुआ दं’गा शामली में भी फैल गया . से’ना बुलाई गई, 2300 श’स्त्र लाइसेंस रद किए गए, 1455 लोगों पर हिं’सा से जुड़े कुल 503 मामले दर्ज किए गए थे . दं’गों के दौरान भाजपा नेताओं पर जाट समुदाय को बद’ला लेने के लिए उक’साने के आरोप लगे . 2017 में योगी सरकार आने के बाद दर्ज 131 मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हुई थी .

photo source – india today

ह’त्या के जिन 10 मामलों में 40 आरो’पियों को बरी किया गया है, उसके पीछे सबसे बड़ा कारण है गवाहों का अपने बयान से मुकर जाना . कई गवाहों ने कहा कि वो दं’गा भड़कने से पहले ही गाँव से निकल गए थे जबकि कई आरोपियों ने कहा कि उनसे जबरदस्ती सादे कागज़ पर दस्तखत लिए गए और उनपर दस्तखत के ऊपर मुकदमा दर्ज कर दिया गया.