अब नहीं बचेंगे सुस्त सरकारी कर्मचारी, केंद्र सरकार ने की ये पहल

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पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरा कार्यकाल शुरू करते ही ये सन्देश साफ़ साफ़ दे दिया था कि अब काम में लापरवाही बरतने वाले और सुस्त कर्मचारी बर्दास्त नहीं किये जायेंगे. सरकार का मानना था कि जनहित के कामों में अधिकारियों की वजह से देरी होती है और योजनायें सही समय पर जनता तक नहीं पहुँच पाती. शायद अधिकारियों ने समझा होगा कि दोबारा चुन कर आने के बाद प्रधानमंत्री की जोश में आ कर ऐसी बातें कर रहे हैं लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं था. सरकार ने अपना रुख साफ़ कर दिया था कि भ्रष्टाचार और लापरवाही पर सरकार की नीति जीरो टोलरेंस की रहेगी और इसी नीति पर चलते हुए केंद्र सरकार ने काम में लापरवाही बरतने के आरोप में 312 कर्मचारियों को जबरन रिटायर्मेंट दी दिया है. इनमे कई सीनियर अधिकारी भी है तो कई अधिकारी जॉइंट सेक्रेटरी रैंक के भी हैं. 187 कर्मचारी ग्रुप बी के हैं जबकि 125 कर्मचारी ग्रुप A ग्रेड के हैं.

जुलाई 2014 से मई 2019 के बीच करीब 1.2 लाख कर्मचारियों के कार्यशैली कि समीक्षा की गई. इनमे से 36,756  कर्मचारी ग्रुप ए और 82,654  कर्मचारी ग्रुप बी के थे. 312 कर्मचारियों को जबरन रिटायर्मेंट देने के मुद्दे पर विपक्ष ने लोकसभा में हंगामा किया तो सरकार ने जवाब दिया कि अनुशासनात्मक नियम के अनुसार सरकार के पास उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है. जनता के हितों की अनदेखी करने और निष्ठा की कमी और लापरवाही दिखाने वाले अफसरों पर मौलिक नियमों के प्रावधान (एफआर) 56 (j) (i), केंद्रीय सिविल सर्विस के नियम 48, पेंशन नियम 1972 और सिविल सेवा नियम 16 (3) (संशोधित) के तहत कारवाई करने का केंद्र सरकार के पास पूर्ण अधिकार है.

सिर्फ केंद्र सरकार ने ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भी भ्रष्टाचार और कार्यनिष्ठा में कमी के आधार पर करीब 200 कर्मचारियों को जबरन रिटायर कर दिया था और 400 कर्मचारियों को दंड दिया गया था. उत्तराखंड सरकार भी कई ऐसे कामचोर और सुस्त कर्मचारियों को जल्द रिटायर्मेंट देने पर विचार कर रही है . सरकार ने सभी विभागों को ऐसे कर्मचारियों और अधिकारियों की सूचि बनाने को कहा है जो काम में लापरवाही बरतते हैं.

मध्य प्रदेश कि कमलनाथ सरकार भी निकम्मे कर्मचारियों से बहुत खफा है और वहां भी सरकार ने विभागों को ऐसे कर्मचारियों की सूचि तैयार करने का निर्देश दिया है . दरअसल देश में भ्रष्टाचार और सरकारी कामों में लेट लतीफी बहुत आम बात है और ये सरकारी विभागों में बहुत ही गहरे तक पैठ बना चूका है. हर काम में फ़ाइल एक टेबल से दुसरे टेबल तक सरकाना और इस बहाने काम को टालने रहना, इस प्रवृति के कारण सरकारी कर्मचारी तो बदनाम होते ही हैं . सरकार की योजनायें भी सही वक़्त पर जनता तक नहीं पहुँच पाती है जिस कारण सरकार ने अब ऐसे कर्मचारियों से पीछा छुड़ाने का निर्णय लिया है .