24 सितंबर 2002 का वो हादसा जिसने गुजरात की मोदी सरकार को हिला के रख दिया।

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आज 24 सितंबर 2019 है, चलिए आपको आज से 17 साल पीछे ले चलें और 24 सितंबर 2002 के एक ऐसे आतंकवादी हमले के बारे में आपको बताएं जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया था।

“मौत के साएं हैं हर तरफ,
ईश्वर का घर भी महफूज़ नहीं,
खौफ़ का कोहरा न जाने छंटे कब तलक,
आतंक के सिवा क्या कोई न्यूज़ नहीं ??”

आज 24 सितंबर 2019 है, चलिए आपको आज से 17 साल पीछे ले चलें और 24 सितंबर 2002 के एक ऐसे आतंकवादी हमले के बारे में आपको बताएं जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। तो बात है गुजरात के गांधीनगर की। गांधीनगर के सबसे पॉश इलाके में स्थित अक्षरधाम मंदिर में हुए इस ‘आतंकी’ हमले में 32 से ज़्यादा निर्दोष लोग मारे गए थे। जबकि 80 से अधिक लोग घायल हो गए थे। हमले के वक़्त मंदिर में करीब 600 लोग मौजूद थे। दिल्ली से आई एनएसजी की टीम ने ऑपरेशन ‘वज्रशक्ति’ के तहत दो अतांकवादियों को मारने का दावा किया था।

राजधानी गांधीनगर में मुख्यमंत्री आवास के निकट स्थित इस भव्य मंदिर पर हमले के मामले में एक विशेष पोटा अदालत ने छह आरोपियों को दोषी करार देते हुए इनमें से तीन को फांसी की सजा सुनायी थी। हाई कोर्ट ने भी सजा को बहाल रखा था पर मई 2014 में, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए सभी छह दोषियों को रिहा कर दिया था।

मारे गए अतांकवादियों से उर्दू में लिखे दो पत्र भी बरामद होने का दावा किया गया, जिसमें गुजरात में 2002 के दंगों में मुसलमानों के जान-माल की हानि का बदला लेने की बात की गई थी। बताया गया कि दोनो पत्रों पर तहरीक-ए-किसास नाम के संगठन का नाम लिखा था। केस चलता रहा, जांच होती चली गई। 15 साल बाद 2017 में, इस कांड का मास्टरमाइंड राशिद काफ़ी पकड़ा गया। अन्य आरोपी भी पकड़े गए और यह पाया गया कि सभी आरोपियों का संबंध आइएसाई, जैश और लश्कर से पाया गया।

इस कांड का मास्टरमाइंड राशिद काफ़ी

इस कांड के बाद, हमारी सुरक्षा एजेंसियों और भारत सरकार को झटका लगा और वे काफी सक्रीय हो गई हैं। बहरहाल, वर्तमान की बात करें तो एयर स्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे कड़े कदम भारत ने उठाने शुरू कर दिए हैं। हम आशा करते हैं भारत में आने वाले समय में अतंकवादी हमलों पर पूर्ण रोक लगेगी।

अंत में मैं अपनी पूरी टीम की तरफ से 24 सितंबर 2002 के इस हमले में मारे गए सभी लोगों के लिए भावपूर्ण श्रद्धांजलि व्यक्त करता हूं।

जाते जाते बस इतना ही लिखना चाहूंगा-

“आतंक का विस्तार है ,जन-जन की परेशानी! मिट्टी में मिला खून है, देही में बना पानी,
इस मुल्क में इतना बड़ जायेगा ,ये सोचा नही था। क्यों ठहर नही जाता ,कहता हर हिन्दुस्तानी।”